Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 21, 2012

कादम्बिनी क्लब का दीपावली स्नेह मिलन एवं `नदिया बहना भूल गई’ काव्य -संग्रह का लोकार्पण संपन्न

कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में रविवार दि. 18 नवम्बर 2012 को कल्ब का दीपावली मिलन एवं श्रीमती शशि कोठारी कृत काव्य संग्रह “जब नदिया बहना भूल गई” का लोकार्पण उल्लासमय वातावरण में संपन्न हुआ |

क्लब संयोजिका डॉ.अहिल्या मिश्र एवं कार्यकारी संयोजिका मीना मूथा ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस अवसर पर प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की | लोकार्पणकर्ता प्रो.आलोक पांडे, श्री निर्मल कुमार सिंघवी, श्रीमती विमलेश सिंघी, श्री एम. प्रभु, कवयित्री श्रीमती शशि कोठारी एवं डॉ.अहिल्या मिश्र मंचासीन हुए | श्री लक्ष्मीनारायण अग्रवाल के संचालन में मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित किया गया | श्रीमती शुभ्रा महंतो ने सुमधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की | डॉ.अहिल्या मिश्र ने स्वागत भाषण में अतिथियों का परिचय दिया तथा क्लब का परिचय दिया | उन्होंने कहा कि निरंतर 18 वर्षों से क्लब साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में अपनी पहचान बना चुका है और इसका श्रेय त्रयनगर के साहित्य प्रेमियों को जाता है | तत्पश्चात क्लब सदस्यों द्वारा अतिथियों का पुष्पगुच्छ-शाल द्वारा सम्मान किया गया |

श्रीमती कोठारी कृत “जब नदिया बहना भूल गई” काव्यसंग्रह का परिचय देते हुए डॉ. रमा द्विवेदी ने कहा कि यह काव्यसंग्रह व्यक्तिगत-वैचारिक अनुभूतियों का समूह है |अगर मैं यह कहूँ कि प्रवचन का ये कविताएँ दस्तावेज हैं तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ।कविताएँ भक्तिभाव से पूर्ण एवं अध्यात्म से संबंधित हैं | शीर्षक आकर्षित करता है और यह शीर्षक कविता संग्रह का सार तत्व है | शिल्प की दृष्टि से अनगढ़ ही सही किन्तु प्रेम भक्तिधारा में पाठक को बहा ले जाती है,यही इन कविताओं की सार्थकता है | हर कविता का कथ्य स्वयं पर आलंबित किया है इसलिए कवयित्री उपदेशात्मकता से बच गई है | नदी का प्रतीक लेकर शशि जी ने नारी जीवन के उतार-चढ़ाव, विसंगतियों का चित्रण और फिर प्रेमरूपी सागर में मिलकर खुद के अस्तित्व को विलीन कर देना या मिटा देना, नारी जीवन की इस चाह को बहुत ही सुंदरता से चित्रित किया है |कवर पेज आकर्षक ,पृष्ठ सज्जा मनमोहक है,छपाई साफ़-सुथरी है । डॉ. रमा ने कविता के कुछ काव्यांश पढ़कर सुनाए |

तत्पश्चात प्रो.आलोक पांडे एवं अतिथियों के करकमलों से तालियों की गूँज में काव्यसंग्रह का लोकार्पण हुआ | प्रो.पांडे ने कहा कि सुन्दर भावों के साथ ये कविताएँ एक लम्बी प्रार्थना है | नए तरिके से सोचने पर पाठक को मजबूर करती है | भाषा सक्षम है, कवयित्री को साधुवाद | ’आसमान’ कविता के अंश भी उन्होंने पढ़कर सुनाए | श्री सिंघवी ने कहा कि ज्ञानपंचमी का जैन दर्शन में बहुत महत्त्व है और इस शुभ संजोग पर शशिजी के किताब का लोकार्पण हो रहा है | उन्हें मेरी हार्दिक बधाइयां | इनकी रचनाएँ पथप्रदर्शक बनकर अध्यात्म एवं चिंतन के भावविध में ले जाती है | श्रीमती सिंघी ने कहा कि जीवन एक चुनौती, एक कसौटी, एक कर्तव्य, एक उत्तरदायित्व है | ‘ये जिंदगी है एक उपहार खो नहीं जाए’ गीत को लयबद्ध कर सुन्दर प्रस्तुति दी | श्री प्रभु ने संग्रह को गागर में सागर बताया | प्रो.ऋषभदेव जी ने अध्यक्षीय बात में कहा कि कवयित्री के पास विशेष शब्दों की बुनावट है | शीर्षक काव्यात्मक है | प्रेम और शांति की कामना करने वाला व्यक्ति कवि जरुर होता है | पूरे जगत के साथ अपनी अनुभूतियों को जोड़ने की बात शशिजी करती है | भाषा सशक्त है, नि:संदेह वे आगे बढ़ सकती है | कविता और वार्ता में फर्क बताते हुए उन्होंने कहा कि वार्ता सूचना देती है, कविता भावना विचार के माध्यम से सौन्दर्य की कृति है |

श्रीमती शशि ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे 2 प्रश्नों ने उद्वेलित किया – हम क्या है? हम क्यूँ आए संसार में? सकारात्मक दृष्टिकोण एवं खुश रहो,खुशियाँ फैलाओ, इस सच्चाई को मैंने पहचाना | स्व को प्यार करेंगे तो सबको प्यार करेंगे | क्लब की ओर से शशि जी का सम्मान हुआ तथा डॉ.रमा द्विवेदी का सम्मान शशि कोठारी ने पुष्पगुच्छ से किया | प्रथम सत्र के समापन पर मीना मूथा ने आभार व्यक्त किया |

दितीय सत्र में श्री नरेंद्र राय की अध्यक्षता एवं प्रो. ऋषभदेव शर्मा, श्री तेजराज जैन, डॉ. मिश्र के आतिथ्य में तथा लक्ष्मीनारायण के संचालन में काव्य गोष्ठी आयोजित हुई | सम्पूर्ण कार्यक्रम में आयोजक डॉ. सुशील कोठारी, डॉ. सीता मिश्र, डॉ रमा द्विवेदी ,मीना मुथा वेणुगोपाल भट्टड़, अजित गुप्ता, जुगल बंग जुगल, विनीता शर्मा, ए. कुरियन मोना, वी.वरलक्ष्मी, गौतम दीवाना, संपत देवी मुरारका, सुषमा वैद, सत्यनारायण काकडा, सरिता सुराना जैन, उमा सोनी, सूरज प्रसाद सोनी, तनुजा व्यास, तन्मय-संजय, पनिया, स्नेहिता कोठारी, रायचंद राकेचा, सुमेर सिंग, बालाप्रसाद गोयल, दीपक वाल्मिक, पूर्णिमा शर्मा, प्रो.सुरेश पूरी, बिशनलाल संघी, मुकुंददास डांगर, सीताराम, पुरुषोत्तम कड़ेल, भावना पुरोहित, हेमांगी ठाकर, आनंद सुराना, डॉ. देवेन्द्र शर्मा, आदि की प्रशंसनीय उपस्थिति रही | सरिता सुराना के धन्यवाद के साथ कार्यक्रम का समापन रहा |

-डॉ रमा द्विवेदी

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