Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 22, 2012

दिल चुप रहेगा नहीं -एक मुक्तक

मै समंदर हूँ तुम हो मेरी संगिनी गर मिलोगी न दिल चुप रहेगा नहीं
घोर क्रंदन करूंगा न आओगी गर बिन तेरे मेरा दिल लगेगा   नहीं
युग- युगों तक लिखी जायेगी तेरे मेरे मिलन की यह दास्ताँ
सृष्टि होगी ख़तम हम न होगे अगर, नाम लेने को कोई बचेगा नहीं ।

डॉ रमा द्विवेदी
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