Posted by: ramadwivedi | दिसम्बर 21, 2012

तार-तार अस्मिता – हाइकु

दिल्ली के गैंग रेप `दामिनी’ की पीड़ा को शब्द देने का प्रयास भर है …

1-कैसे हो बयाँ
ज़ुल्म की ये दास्तान
शब्द -खामोश ।

2- रौंद दी गई
एक और अस्मिता
दोषी फरार ।

3-फूल -सी बेटी
दरिंदों ने कुचली
चीखती रही ।

4-तन व आत्मा
हुआ लहूलुहान
बेजान लाश ।

5-कैसा समाज
तार-तार अस्मिता
देश महान ।

डॉ रमा द्विवेदी
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Responses

  1. yahi to vidambna hai Rama ji …. doshi sada hi farar rahte hain… aur mamla thanda ho jane par fir se apni kargujariyan shuru kar dete hain….

  2. घटना से मन बहुत दु:खी था।आपके हाईकु पढ़ कर दृश्य आंखों के सामने आ गया।रमा जी बहुत सही बयां किया है आपने।
    रेनु चन्द्रा

  3. मंजू जी एवं रेनू जी ,हाइकु पर अपने अमूल्य विचार प्रेषित किये …बहुत बहुत हार्दिक आभार…


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