Posted by: ramadwivedi | जनवरी 13, 2013

बौना हुआ आदमी – हाइकु

चुन -चुन के
तिनकों से बनाया
बिखरा घर ।

संकीर्ण सोच
बौना हुआ आदमी
ओछो ही रहे ।

लांघ न सके
दहलीज की सीमा
ताउम्र -कैद ।

रचीं साजिशें
कुचल डाली आत्मा
वहशियों ने ।

छूटती नहीं
अतीत की स्मृतियाँ
भूलती नहीं ।

डॉ रमा द्विवेदी
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Responses

  1. अच्छा लगा पढना …
    इस विषय पर मेरा लिखा भी पढ़ सकते हैं ..
    क़द से ऊँची है आदमी की अना
    ऊँचाई पर भी बौना ही हुआ
    पूरा पढने के लिए लिंक …
    http://sharda-arorageetgazal.blogspot.in/2010/05/blog-post_28.html

  2. हार्दिक आभार शारदा अरोरा जी …अनुभुति कलश में आपका स्वागत है …


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