Posted by: ramadwivedi | मई 14, 2013

खुद को आजमाने का – क्षणिकाएँ

1- डूबने भी दो
मुझे गम के दरिया में
तुम्हें तो डूबना नहीं आता
डूबने का इल्म
सिर्फ और सिर्फ
मेरे पास है ।

2- मैं बूँद हूँ तो क्या
लेकिन मैं
खुद को आजमाने का
हौसला रखती हूँ
इसलिए तो
विशाल समंदर से
खुद ही मिलती हूँ ।

डॉ रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved

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Responses

  1. bhut sundar


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