Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 2, 2013

साँसों की सरगम और डॉ. रमा द्विवेदी( डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा )

saanso ki sargam

साँसों की सरगम( हाइकु-संग्रह) ,रचनाकार :डॉ. रमा द्विवेदी ; आवरण: ॠतु चोपड़ा ;
प्रथम संस्करण :2013 ;मूल्य : 150 रुपये(सज़िल्द) ; पृष्ठ:96 ;प्रकाशक :हिन्द युग्म,1,जिया सराय ,हौज ख़ास ,नई दिल्ली -110016
वर्त्तमान में हिंदी साहित्य -संसार में चमत्कृत करते हाइकु- संग्रह दृष्टिगोचर हुए हैं ।डॉ. रमा द्विवेदी द्वारा रचित ‘साँसों की सरगम’ भी ऐसी ही उत्कृष्ट पुस्तकों में है ;जो सुन्दर भावाभिव्यंजना ,सरस ,मधुर भाषा-शैली के साथ ही भारतीय संस्कृति की मधुर रागिनी को भी हृदय में धारण किये है ।सोलह खंड मानो पुस्तक के सोलह शृंगार हैं ;जिनमें कवयित्री ने समाज और साहित्य की विविध भाव- दशाओं का बहुत ही मोहक निरूपण किया है ।
कविमन का प्रकृति के प्रति प्रेम शाश्वत है ;कविता अधूरी है उसके बिना ।साँसों की सरगम भी प्रकृति की सुन्दर छटा के साथ ही अपनी तान छेड़ती है ।उसकी प्रकृति कहीं अलसाई वधू तो कहीं अल्हड़ नवयौवना है ।इस मानवीकरण में हैरान परेशान चन्द्रमा का बिम्ब अनुपम है ।साथ ही उनकी प्रकृति उदात्त भावनाओं का सम्प्रेषण करती चलती है ।उदाहरण द्रष्टव्य हैं –
प्रकृति वधू / अलसाई सी उठी / अलसभोर ।
दिन या रात /चन्द्रमा परेशान / ब्रह्म मुहूर्त ।
धरती हूँ मैं / सहिष्णुता है धर्म / स्नेह बाँटती ।
खुद तपते / करते उपकार / वृक्षों सा प्यार ।
कवयित्री आत्मिक ,पावन प्रेम की उपासिका है ।मानवीय सम्बन्धों के यथार्थ स्वरूप से परिचित भी है ।उनकी सजग दृष्टि समाज के प्रत्येक व्यवहार पर है यही कारण है कि उनकी कलम हर श्याम-श्वेत पक्ष को उजागर करती है; फिर चाहे वह आधुनिक परिधान हो ,भाषा हो ,संवेदनहीन रिश्तें हों या अन्य सामाजिक विद्रूपताएँ ।स्त्री के विविध रूप हैं ;तो वीर सैनिकों के प्रति नमन भी ।ऋतुओं की सुन्दर छटा है तो शोषित और शोषण की दशा देख व्याकुल मन की अभिव्यक्ति भी है ।—
इश्क न देह / न मजहब-जाति / यात्रा रूह की ।
हर रिश्ते में / होता है अनुबंध / दर्द-पैबंद ।
तृष्णा तरुणी / सुरसा सी बढ़ती / सदा युवती ।
तिजोरी बंद / बंधुआ बचपन / छटपटाता ।
वास्तव में नए वर्ष का स्वागत करती ,दोस्ती और दोस्त के साथ ही जापानियों के साहस को सलाम करती रमा जी की दृष्टि ने आज के सर्वाधिक लोकप्रिय सोशल माध्यम गूगल बाबा और फेस बुक को भी पर्याप्त सम्मान देकर निहाल किया है ।रचना एवं रचनाकार हिंदी साहित्य जगत् को अपनी सशक्त उपस्थिति से गौरवान्वित करेंगी और सहृदयों के ह्रदय को आह्लादित ऐसी हार्दिक शुभ कामनाएँ !!
बहु आयामी लेखनी के प्रति सादर नमन !
-0-
सम्पर्क :डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
टावर एच-604, प्रमुख हिल्स , छरवडा रोड , वापी , जिला , वलसाड (गुजरात) -396191

`साँसों की सरगम’ की समीक्षा `हिन्दी हाइकु ‘ के इस लिंक पर भी देखी जा सकती है
http://hindihaiku.wordpress.com/2013/09/02/साँसों-की-सरगम-और-डॉ-रमा-द्/#comment-5518

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: