Posted by: ramadwivedi | जून 19, 2014

`गुलमोहर ‘पर हाइकू

प्यार दर्शाता
करे पुष्पाभिषेक
गुलमोहर ।

स्वागत करे
प्रेम में बिछ जाए
गुलमोहर ।

पी लेता ताप
ज्वालामुखी सूर्य का
फिर भी हँसे ।

याद दिलाए
भूली -बिसरी यादें
प्रिय की बातें ।

हमें बताओ !
हँसने का रहस्य
गुलमोहर ।

सोख लेते हो
धरा से प्राण ऊर्जा
गुलमोहर ।

देखा न सुना
तुम -सा प्रेम योगी
गुलमोहर ।

डॉ रमा द्विवेदी
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