Posted by: ramadwivedi | जुलाई 14, 2014

षष्ठम साहित्य गरिमा पुरस्कार प्रदत्त एवं `गुलमोहर ‘ लोकार्पित

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षष्ठम साहित्य गरिमा पुरस्कार प्रदत्त एवं `गुलमोहर ‘ लोकार्पित

साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति एवं ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में होटल `क्वालिटी इन फिडाल्गो ‘ ,नामपल्ली में 13 जुलाई 2014 को षष्ठम साहित्य गरिमा पुरस्कार- 2012 प्रदान किया गया तथा इस अवसर पर `गुलमोहर ‘कहानी संग्रह का लोकार्पण भी किया गया ।
संस्था की संस्थापक अध्यक्ष डॉ अहिल्या मिश्र एवं महासचिव डॉ रमा द्विवेदी ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस समारोह की अध्यक्षता हैदराबाद विश्व विद्यालय के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ पुष्पेश ने की ।
समारोह का आरम्भ शुभ्रा महंतो की सरस्वती वंदना एवं अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया । डॉ अहिल्या मिश्र ने अतिथियों का परिचय व स्वागत भाषण देते हुए कहा कि यह पुरस्कार निरंतर आगे बढ़ता रहे मैं सिर्फ इतना ही चाहती हूँ । डॉ रमा द्विवेदी ने संस्था का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा डॉ सीता ने लेखिका का परिचय दिया जबकि लक्षमीनारायण अग्रवाल ने प्रशस्ति -पत्र का वाचन किया ।प्रो ऋषभदेव शर्मा ने अपने अभिमत में कहा कि पुरस्कार की प्राविधि व प्रक्रिया पारदर्शी है एवं क्ष्रेत्र विस्तार के साथ अब यह जनता का पुरस्कार बन गया है । तत्पश्चात वडोदरा की वरिष्ठ लेखिका श्री मती नीलम कुलश्रेष्ठ को उनके कहानी संग्रह `शेर के पिंजड़े में ‘ के लिए षष्ठम साहित्य गरिमा पुरस्कार के रूप में ग्यारह हजार की राशि ,शॉल , प्रशस्ति पत्र,स्मृति चिह्न एवं पुष्प गुच्छ मुख्य अतिथि श्री विश्व जीत सपन के करकमलों से प्रदान कर सम्मानित किया गया । सम्मान प्राप्त करते वक्त नीलम कुलश्रेष्ठ की आँखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और भाव विभोर होकर उन्होंने कहा कि साहित्य गरिमा सम्मान पाकर वह बहुत गर्व का अनुभव कर रही हैं।उन्होंने ने सभी अतिथियों एवं संस्था के पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया ।
इस कार्यक्रम में शान्ति अग्रवाल कृत `गुलमोहर ‘ कहानी संग्रह का लोकार्पण श्री टी गोपाल सिंह तथा अतिथियों द्वारा किया गया । कहानी संग्रह का परिचय देते हुए डॉ जी नीरजा ने कहा कि सभी कहानियां मानवीय संवेदनाओं एवं जीवन के यथार्थ को अभिव्यक्त करती हैं । लेखिका ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने मन की अनुभूतियों को कागज़ में उकेरती हैं ।
श्री टी गोपाल सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य गरिमा पुरस्कार प्रशंसनीय प्रयास है और वे हेमशा अपना सहयोग बनाये रखेंगे । मुख्य अतिथि श्री विश्व जीत सपन ने अपने वक्तव्य में कहा की साहित्यकार की नज़र पारखी होती है और वह साधारण घटना को अपने लेखन का कथ्य बनाता है । उन्होंने कहा कि साहित्य गरिमा पुरस्कार एक क्रांतिकारी कदम है इसे पूरे देश की लेखिकाओं के लिए दिया जाना चाहिए । डॉ मुरलीधर गुप्ता ने कहा कि साहित्य गरिमा पुरस्कार स्त्री सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रहा है यह सराहनीय कार्य है । श्री मधुसूदन सोंथालिया ने कहा कि वे अपना सहयोग बनाये रखेंगे । डॉ पुष्पेश ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि समाजशास्त्र और साहित्य के नज़रिए में बहुत समानता है और दोनों समाज की समस्याओ का समाधान करने में सक्षम हैं ।
समारोह का सभागार नगर के गणमान्य साहित्यकारो एवं साहित्य प्रेमियों से खचाखच भरा हुआ था । इस समारोह का सञ्चालन डॉ अर्चना झा ने किया और मीना मुथा ने आभार प्रदर्शन किया तथा रात्रि भोज के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ ।

डॉ रमा द्विवेदी -महासचिव -साहित्य गरिमा पुरस्कार
9849021742

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