Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 10, 2014

आत्मा है कलुष – ताजा गीत

इस ज़माने में हैं  कैसे -कैसे मनुज
उजले चेहरे मगर आत्मा है कलुष ।
कहने को तो ज्ञान के ये भंडार  हैं
 इनकी  पैनी नज़र धन के अंबार  हैं
जेब कतरे हैं ये जेब लेते क़तर
उजले चेहरे मगर आत्मा है कलुष ।
हर नगर ,हर शहर जाल इनका बिछा
मीठी बातों से लेते है सबको लुभा
ख्वाब रंगीन दिखा लूटते इस कदर
उजले चेहरे मगर आत्मा है कलुष ।
फन  विषैले हैं इनके खतरनाक हैं
इनके डसने का न कोई इलाज है
पैंतरे ये बदलते हर घडी ,हर कदम ।
उजले चेहरे मगर आत्मा है कलुष ।
डॉ रमा द्विवेदी

© All Rights Reserved

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: