Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 29, 2014

आओ मेघा हमरे अंगना -गीत

आओ मेघा आओ मेघा हमें नहीं तरसाओ तुम
आओ मेघा हमरे अंगना नेह-नीर बरसाओ तुम ।

धरती प्यासी ,नैना प्यासे, प्यासा हर इंसान यहाँ
सारस जोड़ा खेत न आवे प्यासा हर किसान यहांँ
हर मनुआं की प्यास बुझा दो रुनझुन गीत सुनाओ तुम
आओ मेघा हमरे अंगना नेह-नीर बरसाओ तुम ।

ताल-तलैया ,पोखर सूखे ,जलबिन मीन तड़पती है
चीरहरण हो गया धरा का विलख -विलख कर रोती है
लाज बचाने आओ कन्हैया धानी चुनर ओढ़ाओ तुम
आओ मेघा हमरे अंगना नेह-नीर बरसाओ तुम ।

आओ मेघा जल्दी आओ ,नर्तन करते -करते आओ
चातक बन मैं तुम्हें पुकारूँ स्वाति बूँदें बन के आओ
ऊसर को उर्वरा बना दो प्रीत की रीत निभाओ तुम
आओ मेघा हमरे अंगना नेह-नीर बरसाओ तुम ।

आओ मोरे कृष्ण -कन्हैया जसुदा -नन्द के हो तुम छैया
गोपियों के संग रास रचाओ ,छांछ पे नाचो ता-ता थैया
धरती का कण-कण मुस्काए प्रीत की धार बहाओ तुम
आओ मेघा हमरे अंगना नेह -नीर बरसाओ तुम ।

डॉ रमा द्विवेदी

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