Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 22, 2014

चिंतन के कुछ बिंदु यूँ ही

बाबाओ के रहस्य-लोक समझ सका न कोय
सबहिं को सम्मोहित करे बाबागिरी सो होय ।

कबिरा दोहे बोल -बोल कर बन बैठा भगवंत
कबिरा भौचक्क देखता रामपाल -सा संत ।

राम नाम से चल रहा बाबाओं का व्यापार
जनता हो गई बावरी कृपा करो करतार ।

बाबाओं के माया जाल में फंसते बारम्बार
जादुई चमत्कार का कौन करे प्रतिकार ।

कोई आशाराम है , रामपाल है कोय
काला धंधा एक है नाम बदल के होय ।

डॉ रमा द्विवेदी

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