Posted by: ramadwivedi | मार्च 12, 2016

कैसे -कैसे रिश्ते -दो ताजा मुक्तक

 

 

कैसे -कैसे  रिश्ते  हैं अजूबे

सावन में हरे न भादौं सूखे

हर रिश्ते को चाहूँ बचाना

फिर भी रिश्ते क्यों हैं  रूठे ?
————————–
कैसे -कैसे इलज़ाम  हैं देखो
हर शख्स यहाँ  हैरान है देखो
रामलखन पर केस कर दिया
कैसे  पागल इंसान हैं देखो ।
डॉ रमा द्विवेदी
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