Posted by: ramadwivedi | अप्रैल 21, 2016

दुर्भाग्य से सौभाग्य -कहानी -डॉ रमा द्विवेदी

 

प्रकृति का खेल भी कितना अजब है किसी  को  जन्म लेने के लिए उपयुक्त कोख का  चुनाव करने का कोई हक़ नहीं है कि उसे किस घर में या किस तरह के माता पिता के घर में जन्म लेना चाहिए । बाग़ का माली ही यह तै करता है कि  किस पौधे को कहाँ रोपना है और वह रोप भी देता है चाहे वह जमीन पौधे के अनुकूल हो न हो ।
           आसना  का जन्म भी कुछ ऐसी ही विषम परिस्थितियों में हुआ था । उसकी माँ आस्था ट्यूशन पढ़ने के लिए एक शिक्षक के घर जाती थी और उस शिक्षक ने उसके साथ बलात्कार किया था । नियति की क्रूरता देखो कि  वह गर्भवती हो गई । माँ -बाप ने लोक -लाज के डर  से उसे बंगलोर में ले जाकर रखा और जब आसना  का जन्म हुआ तो वे उसे  एक  अनाथाश्रम के द्वार पर छोड़ आए ।
 बेबस आस्था  को  समझ ही नहीं आ रहा था  कि  उसके साथ यह क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है ? लेकिन उसके वक्षस्थल का ममत्व ठाठें मार रहा था । वह अपनी बच्ची को अनाथाश्रम में नहीं छोड़ना चाहती थी लेकिन वह तो किसी प्रकार से भी समर्थ नहीं थी । वह बहुत रोई ,घर वालों से मिन्नतें की कि  उसे उसकी बच्ची  दे दी जाय लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं था । कमसिन और मजबूर माँ आस्था  को आखिर में  मन मसोस कर रह जाना पड़ा  कि जब वह समर्थ हो जाएगी तब वह अपनी बेटी से मिल पाएगी ।
        आस्था मेडिकल की पढ़ाई कर रही है । समय मिलने पर वह उस अनाथाश्रम में जाने लगती है,जहाँ  पर उसकी बेटी पल रही  है । कुछ समय आसना के साथ खेलकर  वापस आ जाती है । यह क्रम चल ही रहा था कि एक दिन आस्था को पता चलता है कि कोई विदेशी दम्पति आसना को गोद  लेना चाहते हैं  ,यह सुनकर उसका मन  विचलित  हो जाता है लेकिन वह किसी प्रकार से अपने मन को समझाती है कि   “उसकी बेटी को माता -पिता का प्यार -दुलार और समाज में जायज नाम तो मिल जाएगा ”।
यह  सोचकर अपने मन को दिलासा देती है ,जहाँ  भी रहे उसकी बेटी खुश रहे ,इससे ज्यादा उसे कुछ नहीं चाहिए ।  जब कभी वह डॉक्टर बन जायेगी तब वह अपनी बेटी से मिलने जरूर जायेगी ।
     आसना की आँखें बड़ी -बड़ी और बहुत  सुन्दर थी  किन्तु रंग बहुत काला था   इसलिए वह लगभग डेढ़ साल की हो गई लेकिन किसी ने भी उसे गोद लेने की पहल नहीं की थी क्योंकि  सब लोग तो सुन्दर बच्चा ही गोद लेना चाहते हैं लेकिन ये विदेशी दम्पति ने पता नहीं आसना में ऐसा क्या देखा कि उन्होंने उसे ही पसंद कर लिया ।
              विदेश से बच्चा गोद लेने की कागजी कार्यवाही बहुत  पेचीदा   होती  है और बहुत सारी औपचारिकताएँ निभानी पड़ती हैं  अत:  रायना  और डेविड  को जरुरी कागजात जमा करने में काफी समय लग जाता है ,कभी फ़ाइल आगे नहीं बढती तो कभी यह प्रमाण पत्र तो कभी कुछ और कागज़ चाहिए इसी में समय निकलता जाता है । छै माह की कड़ी मशक्कत के पश्चात  आख़िरकार वह दिन भी आ ही गया  जब भारतीय कोर्ट ने उन्हें बच्ची सौपने के लिए भारत  बुलाया ।
        रायना और डेविड आश्रम के अन्य बच्चो के लिए चॉकलेट्स ,कपड़े एवं अन्य उपहार लेके आये । जब उन्होंने बच्चों  को दिया तो बच्चे बहुत खुश हुए लेकिन आस्था को दुःख हुआ कि  अब वह अपनी बेटी से बिछुड़ने जा रही है । बेटी से बिछुड़ने के एक दिन पहले वह अपनी बेटी के लिए चाँदी  की पायल और बहुत सुन्दर ड्रेस लेकर आती है  और उसे पहना  कर बहुत देर तक उसके साथ खेलती रहती है ।  बहुत प्यार-दुलार करती है । आज उसका ममत्व उमड़ -उमड़ पड़ता है ।  कल से  वह उसके साथ नहीं खेल पाएगी यह सोच- सोच कर उसका कलेजा सिहर-सिहर  जाता है लेकिन वह अपने  मन को ढाढस बंधाती है कि  जब कभी वह समर्थ हो जायेगी वह उससे मिलने अवश्य जायेगी ।
      अगले दिन कोर्ट में जज के समक्ष  कागजी कार्यवाही पूरी हो जाती है  ।  रायना और डेविड  कानूनी कागजात पर अपने हस्ताक्षर  कर देते है  तत्पश्चात तमाम लिखित शर्तो के बाद उन्हें आसना सौंप दी जाती है  ।
        रायना और डेविड ने आसना को गले लगाकर बहुत-बहुत  प्यार किया ,उनका उत्साह और ख़ुशी देखने लायक थी ,ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे   दुनिया का  कोई  अनमोल रत्न  उन्हें मिल गया हो । आसना  का दुर्भाग्य पलकते झपकते ही सौभाग्य में बदल गया  । पहली बार उस मासूम की  हवाई यात्रा  आरंभ हुई और आसना देखते -देखते  यूनाइटेड स्टेट ऑफ़  अमेरिका के  कैलिफोर्निया स्टेट ,सैन होजे शहर  पहुँच गई ।
       मेरी बेटी अर्चना  ने बताया कि आज हम बेबी आसना  से मिलने होटल जा रहे है । हम दोनों  जब होटल पहुंचे ,मैंने  देखा कि रायना और डेविड दोनों आसना के पीछे -पीछे दौड़ रहे हैं ,उसे पकड़ -पकड़ कर खाना खिला रहे हैं।  यह दृश्य अत्यंत मनभावन था । दोनों पति पत्नी  दूध के समान गोरे और आसना का रंग कोयले सा काला ।
  उसे देख कर होटल के मालिक ने  पूछ ही लिया कि “साहब ! क्या यह आपकी बच्ची है ” ।
 डेविड ने  गर्व  से कहा `जी, हमारी ही बेटी है ” ।
किन्तु होटल मालिक के आँखों के  हाव -भाव यह बता रहे थे  कि  वह उनके उत्तर से संतुष्ट नहीं हुआ ।
    तब  डेविड ने उसे बताया -` हमने इसे भारत जाकर गोद लिया है तब कहीं  जाकर उस  की शंका का समाधान होता है’ ।
          एक दिन  अर्चना के  हाथ में बहुत सुन्दर निमंत्रण  कार्ड देख कर मैंने पूछा -“यह  किसका निमंत्रण  है  ”?
तब उसने बड़े ही उत्साह से बताया कि आपको याद है न हम एक बेबी से मिलने होटल गए थे ।
मैंने कहा -`हाँ हाँ  उसका नाम आसना था ‘।
तब वह बोली -“आज उसी बेबी  आसना की वेलकम पार्टी है”।
 हमें वहाँ  जाना है । हम दोनों उस पार्टी में गए तो मैंने  देखा कि दोनों पति पत्नी राजस्थानी परंपरागत पोशाक में अतिथियों का स्वागत कर रहे हैं और आसना  को भी चनिया चोली पहना रखी है और उसने  पैर में पायल भी पहनी है । वह खूब इधर – उधर दौड़ रही है और सब लोग उसके साथ खेलने की कोशिश कर रहे हैं  ।
     मैं  आश्चर्य चकित रह गई कि विदेशी दम्पति भी इतना खुश हो सकते  है ? कई सवाल मन में उठे और जवाब पाने की उथल पुथल मन में मची रही । पार्टी बड़े ही धूमधाम से हुई । बड़ो  ने और  बच्चो ने  खूब लज़ीज़ खाना एन्जॉय किया।  बच्चों ने गेम्स खेले , ढेर सारे बैलून उड़ाए । महिलाओं  और  बच्चों को रिटर्न्स गिफ्ट चूड़ियाँ बिंदी ,सेंटेड साबुन , चॉकलेट्स ,बैलून्स और केक भी मिला । सब लोगों ने पार्टी खूब एन्जॉय की और ख़ुशी-ख़ुशी सब अपने  घर  चले  गए ।
           आसना से मेरी एक और मुलाक़ात रायना के घर पर हुई । मैंने वहाँ  पर देखा कि रायना हिंदी में बोल -बोल कर  आसना को इडली,चटनी और सांबर खिला रही है  । मैंने आश्चर्य चकित हो पूछ ही लिया -`रायना तुमने  साउथ इंडियन खाना बनाना ,कब और कैसे सीखा’ ?
रायना ने बड़ी सरलता से उत्तर दिया -` आसना को लाने से पहले मैंने साउथ इंडियन खाना बनाने का कोर्स किया क्योंकि  इसे यही खाना खाने  की आदत थी ‘।
तब मैंने पूछा -`तुमने  हिंदी बोलना कब सीखा’ ?
उसने उत्तर दिया – बस थोड़ा -थोड़ा रोमन में लिख कर बोलना सीख लिया । क्योंकि  आसना को इंडिया का वातावरण ,रहन सहन ,वेश भूषा एवं खाना -पीना जो देना था वर्ना नए वातावरण  में बच्ची सहज नहीं हो पाती और ऐसे में उसके बीमार पड़  जाने की संभावना बढ़ जाती । हम नहीं चाहते थे  कि बच्ची के साथ ऐसा कुछ हो।
तब मैंने यह भी नोटिस किया कि  रायना पंजाबी ड्रेस पहने  हुए थी ।
मेरे मन में कई प्रश्न अब भी कुलबुला रहे थे पर संकोचवश पूछ न सकी ।
          मैंने घर आकर अपने  अर्चना  से पूछा -`रायना की उम्र बहुत कम है ,वह खुद भी बच्चा पैदा कर सकती थी क्यों नहीं किया ?
            मेरी बेटी उसके जीवन के बारे में सब जानती थी उसने बताया कि  रायना  की फेमिली में  उम्र बढ़ने पर अंधे  होने की वंशानुगत बीमारी है ,उसके फादर पचास वर्ष में अंधे हो गए ।  रायना ने इसलिए खुद का बच्चा नहीं किया क्योंकि  डॉक्टर का कहना था कि  अगर उसने बच्चा किया तो अंधे होने का प्रोसेस और भी जल्दी शुरू हो जाएगा  अत : उसने खुद का बच्चा नहीं किया और बच्चा गोद ले लिया । उसके पति ने भी उसका साथ दिया और वे इंडिया से बच्चा गोद ले आये क्योंकि उनके पास पैसे कम थे और यहाँ की अपेक्षा  वहाँ कम पैसे  से  भी बच्चा गोद ले सकते है । भविष्य में उसे अभी एक और अँधी बच्ची गोद लेनी है और वे जरूर लेंगे । उसने एक अंधी बिल्ली भी पाल रखी है ।
       मैं यह सब सुन अवाक रह गई और सोचने लगी वो इतनी संवेदनशील  कैसे बनी ? जो अंधे जानवर की भी देखरेख करती है ।
और मैंने अर्चना से  पूछ ही लिया कि क्या उसके जीवन में कोई अनहोनी घटना घटी है ?
तब अर्चना  ने बताया कि उसके बॉय फ्रेंड ने उसके साथ रेप किया था जिससे वो गर्भवती हो गई थी लेकिन उसकी माँ ने उसकी मर्ज़ी के खिलाफ उसका  अबॉर्शन करवा दिया था और फिर उसकी शादी करवा दी ।
मैंने पूछा –  `क्या उसका पति उसका अतीत जानता है ‘?
उसने बताया – उसका पति उसके भाई का दोस्त था और उसे सब पता था क्योंकि   यहाँ  पर यह सब बहुत कॉमन है और कोई छुपाता नहीं है । उसके पति का अतीत वह भी  जानती है , उसकी पत्नी उसे छोड़ कर अपने बॉय फ्रेंड के साथ चली गई लेकिन ये दोनों अब बहुत खुश हैं ।
     मेरे मन ने भी सारे तार जोड़ने  शुरू कर दिए कि रायना की  संवेदना का उद्गम  कहाँ है?  पर अब  मैं बहुत खुश थी कि रायना ने अपने दुःख को भी अपनी सकारात्मक सोच के द्वारा न केवल खुशियों  में बदल दिया बल्कि जीवन में सही समय पर सही निर्णय लेकर अपनी समस्याओं का सही समाधान भी ढूंढ लिया।
   मैं सोचने लगी , यह सच में  यशोदा माँ  है । खुद ने बच्ची को जन्म  नहीं दिया  तो क्या हुआ लेकिन  गोद ली हुई बच्ची का पालन -पोषण कितनी लगन,प्रेम  और ईमानदारी से कर रही है ,इसे देखकर कोई अनुमान भी नहीं लगा सकता कि इस बच्ची को इसने जन्म नहीं दिया ‘।
“मन से अनायास ही निकला धन्य है ` माँ की ममता’ । माँ देशी हो या विदेशी उसका ममत्व एक समान ही होता है । काश ! हर अनाथ बच्चे का सौभाग्य  आसना जैसा  बन जाता  तो देश के तमाम  अनाथ बच्चों की समस्या हल हो जाती  ”।
    – डॉ रमा द्विवेदी
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