Posted by: ramadwivedi | अगस्त 15, 2016

खुद बन बैठा भगवान है-दो मुक्तक

 

1 -मेरा देश है प्यारा मुझको ,यह मेरी पहचान है
 इससे ही  है वजूद  मेरा,आन,बान और शान  है
 सीमा में प्रहरी बन तत्पर रक्षा में तैनात खड़े जो
 बारम्बार नमन करते  , उनसे ही देश महान  है ।
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2 -आज़ादी का मर्म न समझा ,बदल गया इंसान है
केवल आपहि  आप चरे , वो मानुष पशु समान है
भूल गए  आचार संहिता , मैं ,मैं ,मैं का जाप करें
सारे नियम ताक में रख, खुद बन बैठा भगवान है ।
डॉ रमा द्विवेदी

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Responses

  1. लाजवाब मुक्तक आज़ादी के नाम …


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