Posted by: ramadwivedi | अगस्त 5, 2017

क्या बताऊँ यार ? लघु कथा 

 

भोलानाथ शर्मा जी को अमेरिका में रहते तीस वर्ष हो गए थे | उनके एक लड़की और एक  लड़का था | दोनों ही विवाह योग्य हो गए थे | शर्मा जी ने अपने नाते रिश्तेदारों ,परिचितों एवं मित्रो से वर -वधू  बताने को कह रखा था और शादी डॉट कॉम में भी दोनों की प्रोफ़ाइल डाल रखी थी | कई लड़के -लड़कियों के प्रस्ताव और फोटो आते पर बात न बनती |
 एक दिन गार्डन में टहलते हुए योगेंद्र वर्मा जी की मुलाकात  शर्मा जी  से हो गई | दोनों गहरे मित्र रह चुके थे  लेकिन वर्षों बाद भेंट हो रही थी | वर्मा जी ने बड़ी ही आत्मीयता  से हाथ मिलाकर कहा `कैसे हो यार’?  मुद्दतों बाद मिल रहे हो |  सब ठीक तो है ? अब तो आपके बच्चे शादी करके सेटल हो गए होंगे परन्तु यह क्या शर्मा जी ने   उदास लहजे  में कहा – `कहाँ यार ! बच्चों को कोई पसंद ही नहीं आता’  |
“मैंने कहा कि पसंद क्यों नहीं आता” |
 “ अब क्या बताऊँ यार ,जो हमें पसंद नहीं आता वो उन्हें पसंद आता है ”|
“मैंने कहा -जो उन्हें पसंद है , तुम वो कर दो ”|
शर्मा जी ने  कहा -“एक दिन मेरा लड़का एक फोटो को हाथ में लेकर देख कर गंभीर होकर बोला ,मुझे यह पसंद है ,मैं इससे शादी करूँगा | यह सुनकर मेरी बाँछें खिल गईं कि  चलो इसे कोई तो पसंद आया | लपक कर मैंने फोटो उससे लेकर देखा तो वो लड़की की नहीं लड़का की फोटो थी | मैं अपना माथा पकड़कर बैठ गया” |
उनकी बात सुनकर मैं भी हतप्रभ ताकता रह गया |
डॉ रमा द्विवेदी
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