Posted by: ramadwivedi | अगस्त 5, 2017

दहशत -लघुकथा

 

अमेरिका आये मुझे दो हफ्ते ही हुए थे कि एक दिन बेटी की मित्र मोनिका शाह मुझसे मिलने के लिए आई | बहुत सारी इधर -उधर की बातें हुईं | बातचीत में मोनिका मुझे काफी व्यावहारिक लगी |
मैंने उससे पूछा -`तुम कब से यहां पर हो और तुम्हारे पति क्या करते हैं ?
उसने उत्तर दिया – “मैं बीस वर्षों से यहां पर ही कार्यरत हूँ ”|
और तुम्हारे पति क्या करते हैं ?
बातचीत से पता चला कि उसकी शादी एक दशक पहले ही टूट चुकी है |
मैंने जिज्ञासावश पूछा -“क्या यह शादी `लव मैरिज ‘ थी ”?
`नहीं ‘ उसने संक्षिप्त उत्तर दिया |
“क्या घरवालों ने लड़के को देखा समझा नहीं था ”?
उसने उत्तर दिया – “ मेरे पापा नहीं हैं और मेरा भाई इधर ही काम करता है ,उसने ही यह शादी यह सोचकर करवाई थी कि बहिन पास रहेगी तो उसकी चिंता कम रहेगी और जरुरत पड़ने पर वो मेरी मदद कर पायेगा | देखने में तो वह शक्ल सूरत में अच्छा था और अच्छा कमाता था लेकिन किसी की सीरत को समझ पाना बहुत कठिन होता है ”|
मैंने कहा -“सच है इंसान की फितरत को जान पाना आसान नहीं होता” |
मैंने उससे पूछा “मोनिका ऐसा क्या हुआ जो तुमने शादी तोड़ दी ”?
उसने संजीदा स्वर में कहा -“मेरा पति लव कुमार घर पर रोज `पोर्न फ़िल्में ‘ देखता था | पता नहीं पुलिस ने कैसे ट्रैक किया और दो बार पुलिस हमारे घर आकर उसे वार्निंग दे गई ”|
“मुझे बहुत बुरा लगता था , उसकी इस बीमार मानसिकता से मैं हमेशा दहशत में रहने लगी और हमारे सम्बन्ध की नींव भी हिल गई फिर भी मैंने धैर्य रखकर उसे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उसने मेरी एक न सुनी” |
“एक दिन देर रात पुलिस ने हमारे घर दस्तक दी | जैसे ही मेरे पति ने दरवाजा खोला ,पुलिस ने रंगे हाथों उसे गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया ”|
“मैंने किसी तरह कोशिश करके उसे जेल से छुड़वा तो दिया लेकिन मैंने तभी निश्चय किया कि अब मैं इसके साथ नहीं रहूँगी और मैं तलाक ले लूँगी ” |
मैंने आश्चर्य से पूछा -“क्या वह आसानी से तलाक के लिए राजी हो गया” ?
उसने कहा – “उसे राजी होना पड़ा अगर न होता तो मैं खुद उसे जेल भिजवा देती, क्योंकि छुड़वाने से पहले मैंने यही शर्त उसके सामने रखी थी ”|
आप ही बताएं-“ कोई ऐसे विकृत मानसिकता के आदमी के साथ इतनी मानसिक – दहशत में कैसे और कब तक रह सकता है ”?
“मैंने भी उसकी बात में सहमति जताई” |

*** डॉ रमा द्विवेदी***

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