Posted by: ramadwivedi | अगस्त 30, 2017

सर्व शक्तिवान -लघुकथा

 

महादेव – हेमेंद्र से ,मैं बहुत नामी आदमी बन कर दुनिया में प्रख्यात होना चाहता हूँ ,जिसमें अकूत दौलत हो ,अय्याशी हो और भक्तों की भीड़ | अब बताओ ऐसा कौन सा धंधा है जो यह सब मुझे एक साथ रातोंरात मिल जाए ?

हेमेंद्र -इसमें मुश्किल क्या है? “ तुम बाबा बन जाओ और अपना नाम राम- रहीम , रामपाल , या आशाराम कुछ भी रख लो | बिन लागत एक साथ मान -सम्मान ,दौलत -ऐशोआराम सब कुछ मिल जाएगा और तुम्हें , लोग भगवान् की तरह पूजेंगे” |
महादेव -भगवान् की तरह पूजेंगे ?
हेमेंद्र -“हाँ क्योंकि इस देश में अंध भक्तों और जाहिलों की कमी नहीं है ”|
महादेव कुटिलता से मुस्काया और बोला “ बहुत लाजवाब आइडिया | “पाँचों अंगुलियां घी में और सर कड़ाही में ”|
“जय हो गुरुदेव” !“
हेमेंद्र -लेकिन…… ?
महादेव- लेकिन क्या ?
हेमेंद्र -एक खतरा है , “दुर्भेद्य किले में सेंध लग गई तो …..”?
महादेव -“तो मैं दौलत से सब कुछ खरीद लूँगा ”
हेमेंद्र – `अगर ऐसा न कर पाए तब जेल’…………??
महादेव -तुम वह सब छोडो ,“जब मेरे पास धन- बल , राजनीति – बल , भक्त- बल ,तिलस्म- बल, आतंक-बल, और सर्व शक्तिवान -बल होगा तब मेरा कोई बाल बांका भी नहीं कर पायेगा ”??

*** डॉ. रमा द्विवेदी ***

 

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