Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 29, 2017

एक्सचेंज मैरिज-लघु कथा 

 

 

मेरी एक सहकर्मी उमा ने बताया कि -“”उसके भाई और बहिन की एक्सचेंज मैरिज है ”|
मैंने  पूछा- “ऐसा क्यों किया” ?
उसने कहा – “दहेज़ से बचने के लिए” |
मैंने फिर पूछा -“क्या तुम्हारे भाई -बहिन  इस  शादी से खुश हैं ”?
उसने कहा -`नहीं ‘ मेरी बहिन वाणी की उसके पति श्रीनू से किसी बात को लेकर अनबन हो गई और बात तलाक पर ख़त्म हुई और इस तलाक का प्रभाव  भाई -भाभी के रिश्ते पर भी पड़ा और मेरे भाई ने मेरी भाभी को बेवजह त्याग  दिया जबकि उनके एक तीन साल का बच्चा भी था ”|
दोनों ने तलाक नहीं लिया, न दूसरी शादी की , बस अलग  हो गए |
पंद्रह साल के बाद एक दिन अचानक वह मुझे मिली ,मैंने उससे उसके भाई -बहिन के बारे में पूछा -“तुम्हारे भाई ने शादी की या नहीं  , उसने खुश होकर कहा -“नहीं ,पर उनके बेटे ने माता -पिता में सुलह करवा दी है ”|
उसका उत्तर सुनकर मैं भी प्रसन्न हो गई ,“ज़िन्दगी के बहुमूल्य पंद्रह  वर्ष अलग -अलग रह कर वनवास में कट गए  पर “देर आये दुरुस्त आए”    |
*** डॉ. रमा द्विवेदी ***

 

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