Posted by: ramadwivedi | अप्रैल 6, 2018

हम करब – लघुकथा 

पति – “सुनत  हो ,कल से हम  नवरात्रि के उपवास करब  | खाने का सब  का प्रबंध कर  लीन्हौ है न | कुछ अउर सामान  लाना है का ”?

पत्नी – “तुम न करौ नवरात्रि के उपवास” |
पति – “काहे न करब” ?
पत्नी – “तुम्हार   उपवास करन से हमार काम बहुत बढ़ जात है | हमार समय दिनभर रसोई बनावन में और बर्तन धोवन में बीतत है | तुम्हार बदले हम व्रत रख लेब’ |
पति -“ तुम कछु न खइबो  का ”?
पत्नी – “ हम दूध -फल  खाकर रहि जाइब | संझा  में एक टेम  साबूदाना की खिचड़ी और दही  खा लेब |  हमार टेम  और  श्रम तो बचिहै न” |
पति – “ साबूदाना  का खिचड़ी ? यह भी कौनौ उपवास का खाना है  ”?
पत्नी -“ खिचड़ी राष्ट्रीय व्यंजन है और अत्यंत स्वास्थ्यवर्द्धक है इसलिए अब से तुम न करौ उपवास ,हम करब” |
पति – “ पति अनमना हो  निरुत्तर  हो गया ”|
** डॉ. रमा द्विवेदी **
@सर्वाधिकार सुरक्षित

 

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Responses

  1. ई सब जनै नवरात्री क उप्वास कर रहै है या मन मन्तुर केरि खिचड़ी कैसी होत है यहु विचार


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