Posted by: ramadwivedi | मार्च 27, 2019

होली पर घनाक्षरी

अंग-अंग ले उमंग ,पी के भंग हो मलंग,
झूमें जैसे हो मतंग, आयो छैल- छबीला ।
मारी भर पिचकारी , भींगीं अंगिया औ’ सारी,
सास -नंद देत गारी, लाल ऐसो रंगीला।।
लेके टोली हुरियारे, फिरें गली – गलियारे ,
धूम मची द्वारे -द्वारे , चितचोर सजीला ।
मल मल रंगे गात , देते प्रेम की सौगात ,
रंगों की है बरसात , आयो रंग रसीला ।।
**डॉ. रमा द्विवेदी **

@सर्वाधिकार सुरक्षित

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