Posted by: ramadwivedi | अप्रैल 3, 2019

`अर्थ’ पर कुछ दोहे

1 –
धन से यह जीवन चले , धन से ही भगवान |
धन के बिन कब हो सका ,मानव का सम्मान ||
2 –
धन अर्जन की दौड़ में , खड़े रहें गोविन्द |
जग का वे पोषण करें ,मानव हो खग-वृन्द ||
3 –
पैसे से घरबार है , पैसा विश्व प्रधान |
पैसे से जीवन चले ,पैसे से श्मशान ||
4 –
अर्थ संचलित जगत यह ,अर्थ स्वाचलित स्वर्ग |
अर्थ ,अर्थ ,बस अर्थ है , जीवन इक संसर्ग ||
5 –
धन-देवी चंचल बहुत , टिके नहीं इक गाँव |
लाख तिजोरी में रखो , रुके नहीं इक ठाँव ||
** डॉ. रमा द्विवेदी **

@सर्वाधिकार सुरक्षित

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