Posted by: ramadwivedi | मई 1, 2019

-कुण्डलियाँ छंद-

बातें होतीं फूल सीं ,बातें ही हों शूल |
सहनशक्ति ही दर्द को ,करती है निर्मूल ||
करती है निर्मूल, शूल निष्फल हो जाता।
करे गरल जो पान,वही तो शिव कहलाता।
जिनपर हो विश्वास, वही करते हैं घातें।
चुभती बनकर शूल, सदा अपनों की बातें।।

*डॉ. रमा द्विवेदी *

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