Posted by: ramadwivedi | मई 1, 2019

लोभ /लालच पर दोहे

1 –
काम ,क्रोध ,मद ,लोभ का , यह जीवन आगार |
निर्मल मन कब हो सका ,पल -पल करते वार ||
2 –
लालच देकर ही सदा ,नेता मांगे वोट |
ऊपर से भोले लगें ,मन में रखते खोट ||
3 –
लालच वश ही कर रहे , क्या -क्या यहाँ कुकर्म |
नेताओं का बन गया , जीवन का यह धर्म ||
4 –
सत्ता का मद चढ़ गया , भाषा हुई अपंग |
लालच की हद हो गई , शब्द हो गए तंग ||
5 –
वैतरिणी में लोभ की , डूब रहा संसार |
हे प्रभु जल्दी आइये ,करिये अब उद्धार ||

** डॉ. रमा द्विवेदी **

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