Posted by: ramadwivedi | जुलाई 23, 2019

भावनाओं से खिलवाड़ -लघुकथा

श्रद्धा और विनय दोनों तलाकशुदा थे और जीवन साथी डॉट कॉम के द्वारा एक दूसरे से पहली बार जब मिले तब विनय को श्रद्धा मितभाषी और सरल लगी | श्रद्धा ने कहा -मैं अपने माँ -पापा को अपना निर्णय बता दूंगी |
विनय ने उसे भरपूर समय दिया और कहा जब तक तुम्हें पूरा विश्वास न हो तब तक `हाँ ‘ मत करना |
श्रद्धा ने ठीक एक माह पश्चात अपने माँ -पापा से फ़ोन करवाया और विनय के मम्मी -पापा से इस रिश्ते के लिए `हाँ ‘ कह दी |
विनय और श्रद्धा अक्सर मिलने लगे और घंटो साथ गुजारने लगे |
विनय की मम्मी ने श्रद्धा को घर पर लंच के लिए बुलाया और विनय की पसंद को अपनी स्वीकृति दे दी |
श्रद्धा की माँ का रोज -रोज फोन आने लगा कि जल्दी शादी कर देते हैं लेकिन विनय की मम्मी ने कहा -हमारी बेटी विदेश में है और विनय के एक ही बहिन है इसलिए उसका शादी में रहना आवश्यक है | श्रद्धा की माँ इस बात से सहमत हो गई और शादी की तारीख पाँच दिसंबर निश्चित कर दी |
विनय की माँ ने कहा आप एक बार आकर विनय से मिल लीजिये और घर भी देख लीजिये क्योकिं आपकी बेटी को यहां रहना है | आपको पूरी संतुष्टि कर लेनी चाहिए |
श्रद्धा और विनय को मिलते हुए पांच महीने बीत गए | विनय तो बहुत खुश था लेकिन श्रद्धा ने कहा था जब तक माँ-पापा सहमति नहीं दे देते तब तक शादी नहीं हो सकती |
आखिर श्रद्धा के माँ -पापा ने आने का टिकट बुक करवा दिया | विनय और उस के मम्मी पापा बहुत उत्साहित थे कि चलो वे लोग आ रहे हैं ,फाइनल निर्णय हो ही जाएगा |
आने से एक दिन पहले श्रद्धा की माँ विनय को फोन करके बोलती है कि “ आपका रहन -सहन हमसे बहुत अलग है ,हमारी बेटी कैसे रहेगी ? आप लोग पूजा -पाठ भी कम करते हो ? हमारी बेटी को घर के काम में कुछ न कुछ तो हाथ बंटाना पड़ेगा ? वह काम करके आएगी तो सोयेगी कब ?
विनय ने उत्तर दिया -“ आंटी हमारे घर में कुक और काम के लिए नौकर है | पूजा हमारे घर में भी सुबह शाम होती है पर घंटों -घंटों नहीं | आंटी आप एक बार आकर देख तो लीजिये ,अगर आपको पसंद न आये तो न कह दीजियेगा ”|
विनय के पापा ने श्रद्धा के पापा को फोन करके पूछा -“ आपकी फ्लाइट कब है ,हम एयरपोर्ट आपको लेने आ जाएंगे ”|
श्रद्धा के पापा ने उत्तर दिया -“मिसेज की कुछ ट्रेनिंग आ गयी है इसलिए अभी नहीं आ पाएंगे ”|
विनय के पापा ने पूछा -“ तब आगे का क्या प्लान है ”?
श्रद्धा के पापा ने उत्तर दिया -“ इस माह के अंत तक देखेंगे, अभी मैं पूजा कर रहा हूँ ,कहकर फोन काट दिया ”|
विनय और उसके पापा ने उनकी बात पर विश्वास कर लिया पर उसकी मम्मी को कुछ शंका हुई और उनकी बात पर विश्वास नहीं हुआ |
विनय की मम्मी की शंका सही निकली जब उसने फेसबुक में उन लोगों की फोटोज देखीं कि वे लोग इस शहर में आये हैं | उसने यह बात विनय और उसके पापा को बताई |
विनय ने जब श्रद्धा से पूछा -“ तुम्हारे माँ -पापा यहाँ पर आये और तुमने मुझे सच बताना भी उचित नहीं समझा ”|
श्रद्धा ने जवाब दिया -“ तुम्हारा स्टैण्डर्ड हमसे बहुत हाई है इसलिए मेरे माँ -पापा को पसंद नहीं आया ”|
विनय ने कहा -“हमारा रहन -सहन तो तुम पाँच महीने पहले ही देख चुकी थी ,तब तुमने `हाँ’ क्यों की ?
यह रिश्ता नहीं करना था तो सलीके से न कह देती | अब समझ आया मुझे कि तुमने पहले भी कई लड़कों के साथ भी ऐसा क्यों किया ,तुम साल -छै महीने साथ में घूमकर खूब एंजॉय करती हो ,शादी का आश्वाशन देती हो और फिर तुम और तुम्हारे माँ- पापा सच न बता कर धोखा देते हैं | तुमने मेरी भावनाओं के साथ जो खिलवाड़ किया सो किया अब किसी और लड़के के साथ ऐसा मत करना ”| गुड लक,गुड बाय |

-डॉ. रमा द्विवेदी

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