Posted by: ramadwivedi | जुलाई 23, 2019

हृदय के आवरण खोलो -गीत

सजन रे झूठ मत बोलो ,
हृदय के आवरण खोलो |

ये रिश्ते सच से चलते हैं |
हमें बस झूठ छलते हैं ||
हो दिल में बात गर कोई |
रखें न दिल में ही गोई ||
कटु वाणी में मधु घोलो |
सजन रे झूठ मत बोलो ||

भला चुप रह के क्या मिलता |
हृदय का पुष्प कब खिलता ||
सहज संवाद जो करता |
तभी उत्तर सही मिलता | |
हृदय की ग्रंथियाँ खोलो |
सजन रे झूठ मत बोलो ||

बंधे हम प्रेम बंधन में |
चलेंगे साथ जीवन में ||
ये राहें कब रहीं समतल |
नहीं हम ढूँढ़ पाते हल ||
`समर्पित- प्रेम ‘ को तोलो |
सजन रे झूठ मत बोलो ||

**डॉ. रमा द्विवेदी **

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: