Posted by: ramadwivedi | अगस्त 17, 2019

वर्षा पर दोहे

1 –
जलप्लावित हो रो रही , है ऐसी  बरसात  |
 मेघों ने देखो  किया , धरती पर  उत्पात ||
**डॉ. रमा द्विवेदी **
2 –
खेती -बाड़ी और घर ,डूब गए हैं धान |
कोप देखकर मेघ  का ,रोया बहुत किसान ||
3-
छाता लेकर चल पड़े ,राशन की दूकान |
पक्षी बैठे दुबक कर ,उगा  नहीं दिनमान ||
4 –
चपला लप -लप कर रही ,घन -घन घन आवाज |
ऐसा अनुभव  हो  रहा , गिरी कहीं पर गाज ||
5 -उफन -उफन नदिया बहे , नृत्य कर रहे ताल |
  आया जल- सैलाब यूँ  , सागर भरे उछाल ||
6 –
जलप्लावन से हो रहा ,चहुँदिशि हाहाकार |
त्राहि -त्राहि हर ओर  है ,कृपा करो करतार ||
**डॉ. रमा द्विवेदी **

 

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