बाबाओं की धूर्तता ,समझ न पाते लोग
स्वारथ में अंधे हुए ,लगा विकट यह रोग
लगा विकट यह रोग , बहिन -बेटी दे आते
करें न सोच विचार , उन्हें भगवान बताते |
सुरा -सुंदरी लिप्त , सुरक्षा फ़ौज खड़ी की
नेताओं तक पहुँच, बढ़ी है बाबाओं की ||

*** डॉ रमा द्विवेदी ***

 

 

 

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Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 6, 2017

ढोंगी बाबा -कुण्डलिया छंद

बाबा जी के ढोंग से, मिली आज यह सीख |
झूठों को पतियात जग,सच को मिले न भीख||
सच को मिले न भीख ,सदा ही वह दुख पाता |
झूठ रहे मदमस्त ,,,,,,, महल में मौज उड़ाता ||
पाखंडी हर जगह , तीर्थ स्थल हो या काबा |
रहें सदा ही सजग , बहुत हैं ढोंगी बाबा ||

*** डॉ. रमा द्विवेदी***

 

Posted by: ramadwivedi | अगस्त 30, 2017

सर्व शक्तिवान -लघुकथा

 

महादेव – हेमेंद्र से ,मैं बहुत नामी आदमी बन कर दुनिया में प्रख्यात होना चाहता हूँ ,जिसमें अकूत दौलत हो ,अय्याशी हो और भक्तों की भीड़ | अब बताओ ऐसा कौन सा धंधा है जो यह सब मुझे एक साथ रातोंरात मिल जाए ?

हेमेंद्र -इसमें मुश्किल क्या है? “ तुम बाबा बन जाओ और अपना नाम राम- रहीम , रामपाल , या आशाराम कुछ भी रख लो | बिन लागत एक साथ मान -सम्मान ,दौलत -ऐशोआराम सब कुछ मिल जाएगा और तुम्हें , लोग भगवान् की तरह पूजेंगे” |
महादेव -भगवान् की तरह पूजेंगे ?
हेमेंद्र -“हाँ क्योंकि इस देश में अंध भक्तों और जाहिलों की कमी नहीं है ”|
महादेव कुटिलता से मुस्काया और बोला “ बहुत लाजवाब आइडिया | “पाँचों अंगुलियां घी में और सर कड़ाही में ”|
“जय हो गुरुदेव” !“
हेमेंद्र -लेकिन…… ?
महादेव- लेकिन क्या ?
हेमेंद्र -एक खतरा है , “दुर्भेद्य किले में सेंध लग गई तो …..”?
महादेव -“तो मैं दौलत से सब कुछ खरीद लूँगा ”
हेमेंद्र – `अगर ऐसा न कर पाए तब जेल’…………??
महादेव -तुम वह सब छोडो ,“जब मेरे पास धन- बल , राजनीति – बल , भक्त- बल ,तिलस्म- बल, आतंक-बल, और सर्व शक्तिवान -बल होगा तब मेरा कोई बाल बांका भी नहीं कर पायेगा ”??

*** डॉ. रमा द्विवेदी ***

 

Posted by: ramadwivedi | अगस्त 23, 2017

थोथा चना बाजे घना -मुक्तक

 

 

आजकल का  दौर  यह , थोथा चना बाजे घना 
 संज्ञान  में बस शून्य है ,पर शोर  करते  घनघना
 समझ पाना है कठिन, खुद को समझते श्रेष्ठ जो   
 हठधर्मिता -अज्ञानता- हथियार इनका  अनसुना |
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दुर्धर्ष ये होते बहुत , हठ आसमां तक है तना
गर्दिशों में ये रहें, या तन रहे कीचड़ सना।
इनके बड़बोलेपने का, कोई ओर हो न छोर हो।
सच ही कहते लोग हैं , थोथा चना बाजे घना |
**डॉ रमा द्विवेदी **
Posted by: ramadwivedi | अगस्त 23, 2017

`मरता क्या न करता ‘- लघुकथा

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 सुनंदा और नीरू तलाक की ज्वलंत समस्या पर बात कर रही थीं ,तभी नीरू मेहता ने बताया कि  -` मेरी बचपन की सहेली सुचित्रा बनर्जी  के बेटे का भी  तलाक हो गया |
सुनंदा ने पूछा क्यों हो गया ,तलाक की वजह क्या थी ?
नीरू  ने बताया कि  `सुचित्रा के एक ही बेटा था  अमन बनर्जी | बहुत सौम्य -सुशील लड़का है  और मुंबई में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में  मैनेजर के पद में कार्यरत है  | सुचित्रा ने  उसकी शादी एक छोटे शहर की  सुन्दर -शिक्षित लड़की मोक्षा  चट्टोपाध्याय से सबकी सहमति से कर दिया और बहू को विदा करवा कर अपने घर ले आई ,नई नवेली दुल्हन के आने से घर खुशियों से  महक  उठा | सब लोग बहुत खुश थे कि सब कुछ निर्विघ्न संपन्न हो गया |
कुछ ही  दिन बाद मोक्षा ने   अपने मम्मी -पापा से मिलने की इच्छा प्रगट की |
 सुचित्रा ने बहू के घर भेजने के लिए मिठाइयां ,फल- मेवे और उपहार देकर   अमन  से कहा इसे इसके मम्मी -पापा से मिलवा कर साथ वापस ले आना  लेकिन जब वह अपने घर पहुंची तब  उसने  अमन को यह कह के भेज दिया कि मैं खुद एक दो दिन में आ जाऊंगी | अमन संकोचवश कुछ कह भी न सका और वापस आ गया  |
 जब वो नहीं आयी और न कोई फोन आया तब अमन  ने और सुचित्रा  ने फ़ोन किया और  उससे पूछा कि  कब आओगी ?
“मोक्षा कुछ स्पष्ट न कहकर  गोलमोल उत्तर देती कि मैं थोड़े दिन और  अपने मम्मी -पापा के साथ रहना चाहती हूँ ”|
 अमन ने कहा ठीक है  ,पर जल्दी आ जाना |  लेकिन  दो सप्ताह के बाद भी जब उसने आने की सूचना नहीं  दी ,तब अमन ने उसे फोन किया और तब मोक्षा ने अमन से कहा -“मैं अपने मम्मी -पापा को अकेले छोड़कर कभी नहीं आ सकती , तुम्हें  ही यहाँ आकर रहना पड़ेगा ”|
उसकी बात सुनकर अमन को जोर का झटका लगा पर संयत होकर  उसे समझाने  की हर संभव  कोशिश की और कहा कि  -“ मुझे वहां नौकरी नहीं मिल सकती  इसलिए मैं वहां नहीं रह  सकता, लेकिन मोक्षा ने उसकी  बात  नहीं मानी और संवाद न होने के कारण दूरियाँ बढ़ने लगीं   ”|
सुचित्रा ने भी उसे समझाने की भरसक कोशिश की लेकिन मोक्षा के हठ के आगे उनकी एक न चली और उसके मम्मी -पापा ने भी उसे भेजने से मना  कर दिया |
अमन ने  मोक्षा  के  आने का  एक  वर्ष तक इंतज़ार किया लेकिन वह नहीं आई और तब विवश हो कर अमन  ने  तलाक  के पेपर्स भिजवा दिए |  मोक्षा तलाक के लिए राजी तो हो गई लेकिन तलाक की कीमत मांगी  पचास लाख रूपये का मुआवजा !  और सभी गहने जो वो पहले ही ले गई थी |
`मरता क्या न करता ‘ सुचित्रा ने अपने बेटे की खुशियों  के लिए उस की यह मांग मान ली और  अमन को इस यातनापूर्ण रिश्ते से  मुक्ति दिलवाई ‘  |
यह  सुनकर मैं  सोचने लगी कि -`यह तलाक की कैसी वजह है ? क्या यह शादी मोक्षा  ने  पैसे ऐंठने के लिए ही की थी |  | सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लड़की के घरवाले भी पैसों  के लिए इस तरह के  साज़िश भरे  खेल खेल रहे हैं ?  ऐसे कुटिल चरित्र वाले लोगों को कोई कैसे जाने -परखे ‘? हे ईश्वर ! नई पीढ़ी  को सदबुद्धि  देना !!
** डॉ रमा द्विवेदी **

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