Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 24, 2019

“बहू से बचाओ”  – लघुकथा 

आदरणीय प्रधान मंत्री जी ,“हमें हमारी बहू से बचाओ ” त्रिपाठी जी ने प्रधान मंत्री जी को पत्र  लिखा | हमारी बहू शादी के दो माह  ही हमारे घर रही जिसमें एक माह पति पत्नी बाहर घूमने चले गए | एक माह ही घर पर रही और सास -ससुर व पति को  गाली गलौज और बदसलूकी से बात करके घर में यह कहकर दहशत फैला दी कि तुम अपने माँ -बाप को घर से निकाल  दो नहीं तो मैं दौरी केस में सबको फँसवा  दूँगी  | जब पति ने उसकी बात नहीं मानी तब यह कहके वह मायके चली गई कि  मैं तुम सबको देख लूँगी और वह  एक साल से  मायके में  है | उसके घरवाले हर रोज हमें धमकियाँ  देते हैं कि आकर इसे ले जाओ लेकिन वह अपनी शर्त पर ही आएगी | अगर नहीं ले गए तो डेढ़ करोड़ का मुआवजा   हमें दो नहीं तो हम  दौरी केस में तुम सब को  जेल भिजवा  देंगे” | प्रधान मंत्री जी आपने “ बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ ” का नारा दिया है तो क्या बहू के ज़ुल्मों से  बचने का भी कोई कानून बनाया है | हमारी जान बहुत संकट में है, कृपया हमें इस संकट से बचाएँ  ”| धन्यवाद सहित –

एक पीड़ित ससुर

आर के त्रिपाठी

**डॉ. रमा द्विवेदी **

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Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 24, 2019

विजय उसकी  ही होती  है -मुक्तक 

अगर सपने नहीं होते , यह जीवन  कुछ नहीं होता

जहां में खुशियाँ पाने को ,`परिश्रम -बीज’ क्यों बोता ?

सफल हों न सफल  हों ,ये सिक्के के हैं  दो पहलू

विजय उसकी  ही होती  है ,नहीं जो धैर्य को खोता ||
**डॉ. रमा द्विवेदी **

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Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 24, 2019

कुंडलियां छंद

लाती अपने संग में ,नया -नया सामान |
दुल्हन को  मिलता  तभी , दूल्हे के घर मान  ||
दूल्हे के घर मान  , बहुत खुश दूल्हा होता | 
सुनता है हर बात , सेज फूलों की सोता  ||
कुछ हफ़्तों के बाद ,ठसक बीबी दिखलाती |  
 नया -नया सामान , संग  में  यह  भी  लाती | |
**डॉ. रमा द्विवेदी **
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Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 24, 2019

प्रशंसा – छपास की भूख  -लघुकथा 

“यार  यह बताओ कि बिना लागत के यश और पैसा कैसे कमाया  जा सकता है” ? सरस्वती ने धनलक्ष्मी से पूछा |

धनलक्ष्मी ने कहा -“पहले तुम एक साहित्यिक संस्था खोल लो ,उसमें धनपतियों  को बुलाओ ,मंच पर बिठाओ ,सुनहरे ख्वाब दिखाओ और चाहे वे बोलने में  या  कविता लिखने  में  गधे ही क्यों न हो ,उनकी खूब वाह ,वाह और तारीफ़ करो | बस इतना ही करो ,देखना वे खुद दस -बीस  को तुम्हारे पास लेकर आएंगे और तुम्हारा धंधा शुरू हो जाएगा | तब तुम एक पत्रिका निकालो और मोटी रकम लेकर सबको  सदस्य बनाओ ,कुछ सदस्यों को पत्रिका में पद-नाम दे दो और विज्ञापन लेकर पत्रिका प्रकाशित करो  | धीरे -धीरे तुम्हारी  कमाई दिन दूनी रात चौगनी  होने लगेगी | संस्था में कविता सुनकर प्रशंसा करना और फिर प्रकाशन का लालच देकर कमाई करना  | आजकल उच्च- शिक्षित हो या कम -शिक्षित  सभी  को “प्रशंसा – छपास  की भूख” सबसे अधिक है और वह बाजार में तो  मिल नहीं  सकती | देखना नाम और दाम दोनों तुम्हारे क़दमों में होंगे  ”|

“ अरे वाह धनलक्ष्मी तुम्हारी जय हो | पैसा और यश कमाने की क्या तरकीब बताई है ?  सच में तुम धन की लक्ष्मी  हो ” |

**डॉ रमा द्विवेदी **

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Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 24, 2019

“चालान बनाम लूटतंत्र ”-लघुकथा

“लगान ” के नाम पर अंग्रेजों ने लूट मचाई थी ,अब “चालान” के नाम पर पुलिस वाले लूट रहे हैं ”| सेठ धनीराम ने अपने ड्राइवर मंगू  को हिदायत देते हुए कहा -गाड़ी ठीक से चलाना अगर “चालान” कटा तो तुम्हारे वेतन से काट लूंगा  |

सही है मालिक ,अग्रेंजों ने `लगान’ के नाम पर  किसानों  को लूटा  था लेकिन अब तो “चालान ”  के नाम पर पुलिस जनता को लूट रही है | अब इतना मोटा “चालान ” लगेगा तो लोग वाहन क्यों चलाएंगे ? और काम पर समय से कैसे पहुँच पाएंगे , काम नहीं करेंगे  तो देश का  विकास कैसे होगा? आर्थिक मंदी आएगी तो बस ऐसे ही “टैक्स” और “चालान” के नाम पर वसूली कर-कर के  देश को चलाएंगे | आखिर  बेरोजगारी बढ़ाकर  ही तो अच्छे दिन का ख्वाब दिखाएंगे  ”|

धनीराम बोला – “ यह लोकतंत्र है या लूटतंत्र है ”?

मंगू झट से बोला -“ लूटतंत्र ” |
** डॉ रमा द्विवेदी **

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