Posted by: ramadwivedi | जून 23, 2017

नियति का खेल -लघु कथा 

 

   गार्गी मन्नतों से मांगी हुई संतान थी | तीन भाइयों की सबसे छोटी प्यारी  बहिन थी | बहुत ही लाड प्यार से पली थी | बी ए की  पढ़ाई समाप्त होते ही माता -पिता ने बहुत संपन्न  घर- बर देख कर शादी कर दी | पांच वर्ष में दो बच्चों की माँ बन गई | पति श्री पति  अपने माँ -बाप का अकेला बेटा  था | सब मिलकर साथ ही रहते थे ,बहुत सुखद परिवार था | जीवन के दस वर्ष इसी तरह बीत गए | एक दिन गार्गी अपने विदेश से आये हुए भाई-भाभी  से मिलने के लिए बंगलौर से हैदराबाद आई और दूसरे  ही दिन वापस चली गई | घर पहुंचकर देखा कि श्रीपति अब तक उठा नहीं | माँ से पूछा -तो उन्होंने बताया ऊपर सो रहा है | वह जल्दी से उठाने के लिए ऊपर गई क्योंकि बच्चों  को स्कूल छोड़ना था | एक दो आवाज लगाने पर जब वो नहीं उठा तो हिलाकर देखा ,कोई हलचल न देख वह बहुत जोर से चीखी | उसकी चीख सुनके श्रीपति के माता -पिता दौड़कर ऊपर आये और देखा कि श्रीपति जा चुका था | घर में हाहाकार मच गया | गार्गी बेसुध -सी हो रही थी ,उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि बच्चों  को और मम्मी -पापा को कैसे संभाले | बहुत ही ह्रदय विदारक स्थितियों में अश्रुपूरित नैनों  से श्रीपति का अंतिम संस्कार कर दिया गया |
          गार्गी अपने सास -ससुर के साथ ही रही ,उसने अपने माता -पिता के घर    जाने से भी मना  कर दिया | जवान बहू  को और बच्चों को देख सास -ससुर बहुत चिंतित रहने लगे | अभी बेटे को गुजरे हुए एक वर्ष भी नहीं हुआ था  और उन्होंने एक अच्छा तलाकशुदा लड़का गजानन  के साथ अपनी बहू की शादी करवा दी और अपने ही घर में उसे रख लिया | कुछ समय तक  सब ठीक चला लेकिन इनकी धन दौलत देखकर गजानन की नियति डोल गई  और वह  हमेशा किसी न किसी बहाने आवश्यकता से अधिक पैसों  की मांग गार्गी से करने लगा | एक दिन तो हद ही हो गई उसने गार्गी से कहा घर के पेपर्स में हस्ताक्षर कर दो मुझे लोन लेना है | जब गार्गी ने कहा कि मैं  पापा से पूछकर करुँगी तब उसने उस पर हाथ उठा  दिया |
 गार्गी के  ससुर ने जब उससे  पूछा कि  घर गिरवीं क्यों रखना चाहते हो ? तब उसने बदतमीजी से जवाब दिया “ आप कौन होते है पूछने वाले, मैं जो चाहूँगा करूँगा  ” |
    “ गार्गी के ससुर ने कहा कि यह घर मेरी बहू और बच्चों के लिए है ,ऐसा नहीं हो सकता | तुम्हें रहना है तो कायदे  से रहो वर्ना चले जाओ” | गार्गी ने अपने ससुर के निर्णय को मान दिया  और बात बढ़ने पर पति से तलाक ले लिया |
“ नियति का कैसा खेल है कि जिस सास -ससुर ने  अपने कलेजे पर पत्थर रख कर बहू की शादी करवाई कि उसका और बच्चों का भविष्य  सुरक्षित हो जाए लेकिन नियति ने गार्गी को फिर से अकेला कर दिया”  |
डॉ रमा द्विवेदी

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निर्जन वन में बैठ बुद्ध , ईश्वर का ध्यान- मनन करते हैं
अंतर्मन में द्वन्द बहुत हैं , चित्त साध चिंतन करते हैं
जीवन-मृत्यु औ जर्जर काया , देख बुद्ध का मन घबराया
भोग-विलास त्याग करके सब ,सत्य का वे दर्शन करते हैं |

*** डॉ. रमा द्विवेदी ***18485462_1668905346456221_2856889962367234943_n

Posted by: ramadwivedi | मई 7, 2017

कुंडलियां छंद

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