Posted by: ramadwivedi | अप्रैल 6, 2018

 सरोगेसी एक  व्यवसाय -लघुकथा 

 

 

 

 

सुनैना को `लुपस ‘की बीमारी थी | डॉक्टर ने सलाह दी कि वह संतान पैदा न करे क्योंकि यह बीमारी बच्चे को भी आ सकती है लेकिन हाँ वह सरोगेसी द्वारा संतान प्राप्त कर सकती है |

सुनैना अपने पति के साथ अमेरिका से भारत  आई और   सरोगेसी द्वारा संतान प्राप्त  करने के लिए हैदराबाद स्थित एक बड़े  अस्पताल को गई | यह अस्पताल `आई वी  एफ ‘ के लिए प्रसिद्द है |  `आई वी एफ’  के लिए बहुत सारे टेस्ट की औपचारिकताएं ,सरोगेसी की  पचास प्रतिशत कीमत  का  पेमेंट होने के पश्चात्  ही  पति -पत्नी के स्पर्म और एग का सैंपल लेकर  फ्रीज़ कर दिया जाता है |

एक दिन रानू ने  अपनी सहेली सुनैना से पूछा –   “ क्या हुआ सैम्पल दे दिया ”?
सुनैना -“हाँ ”|
रानू – “ सरोगेसी  की कीमत कितनी बताई” ?
सुनैना -“बीस लाख ” |
रानू आश्चर्य से – “बीस लाख ? कितनी बार ट्राई करेगें और अगर सफलता नहीं मिली तब कितना पैसा लेंगे ?
सुनैना -“ दस लाख | तीन बार ट्राई करेंगे ”|
रानू ने कुछ महीनों  बाद फिर पूछा -“क्या परिणाम आया सुनैना ? सफलता मिली ”?
सुनैना ने अनमने मन से कहा -“ नहीं ,हमारा ही दुर्भाग्य है जो सफलता नहीं मिली ”
रानू ने कहा – “सरोगेसी अब एक  व्यवसाय बन चुका  है ”|

**डॉ. रमा द्विवेदी**

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Posted by: ramadwivedi | फ़रवरी 27, 2018

थाली में छेद -लघु कथा

 

 

 लन्दन से पी एच डी  की हुई  मान्या  ने समर सिंह से शादी इसलिए कर ली कि वह आई आई टी खड़गपुर से पढ़ा था ,थानेदार का बेटा  था ,दहेज़ की कोई मांग नहीं थी और अमेरिका में अच्छी नौकरी कर रहा था | शादी होते ही समर सिंह ने उसका पासपोर्ट यह कहकर ले लिया कि वह अपने पास सुरक्षित रखेगा और  बहला फुसलाकर उसके  साठ हजार पौंड  भी ले लिए  | यहां तक कि उसे नौकरी भी न करने दिया |  मान्या यह उसका प्यार समझकर उसकी हर बात मानती रही |
 समर सिंह उससे निर्वस्त्र होकर डांस करवाता और उसकी डाक्यूमेंटरी बनाकर अपने मित्रों को दिखाता |  धीरे- धीरे  मान्या को पता चल गया और उसने अपने माँ – बाप को बताया  लेकिन किसी ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया बल्कि  उसे समझाया कि “एक बच्चा कर लो सब ठीक हो जाएगा” | वह  गर्भवती हो गई लेकिन समर का उत्पात कम नहीं हुआ  |
तब उसने  अपने पिता को मेल में लिखा  -“ तुम लोग मेरी अर्थी में फूल चढाने के लिए आओगे क्या ”?
तब  मान्या  के पिता अपनी पत्नी को उसके पास छोड़ आए |
 मान्या   को लड़की पैदा हुई और यह  समर को बहुत नागवार गुजरा |
    मान्या   की माँ ने कहा- “ तुम यहां से किसी तरह निकल कर भारत चलो |अब तुम्हारा यहां पर रहना उचित नहीं है |  तब  मान्या ने अपना पासपोर्ट ढूँढा और जब पासपोर्ट मिल गया तब एक रात जब समर घर पर नहीं था तीनो कार लेकर ऑर्फन सेंटर गईं  लेकिन वहां जगह नहीं मिली तब  मान्या  ने   भारत में पडोसी रह चुके अमर का दरवाजा खटखटाया | अमर ने आश्रय यह सोच कर  दे दिया कि कुछ दिनों में चली जायेगी लेकिन  मान्या  कोर्ट केस लड़ने के लिए दस महीने तक उनके घर रुक गई |क़ानून का शिकंजा कसते  देख समर भारत भाग गया , उसका पासपोर्ट ज़ब्त हो गया और वह अरेस्ट हो गया  | मान्या को तलाक भी मिल गया |
 अमर  की विदेशी पत्नी ने मान्या की  हर तरह से मदद की लेकिन  मान्या   ने उसके साठ  साल के अमीर पिता डेविड से घनिष्ट संबंध  बना लिए |   डेविड तीस साल की मान्या  के प्रेमोन्माद में पागल हो गया था | उसने  मान्या   को शादी का प्रस्ताव दे दिया |
   मान्या   ने  कहा – “तुम जब अपनी पत्नी को तलाक दे दोगे तभी मैं तुमसे शादी करुँगी ”|
चार बच्चों का पिता डेविड ने अपनी पत्नी को तलाक देकर  मान्या   से शादी कर ली |
अमर की विदेशी पत्नी ने दुखी होकर सिर्फ  इतना ही कहा – “ तुमने जिस थाली में खाया उसी में छेद कर दिया | मेरे ही घर में रहकर तुमने  मेरे साथ विश्वासघात किया | ईश्वर तुम्हें कभी माफ़ नहीं करेगा ”|
-डॉ रमा द्विवेदी

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Posted by: ramadwivedi | फ़रवरी 22, 2018

थाली में छेद -लघु कथा

 

 

 

 

लन्दन से पी एच डी  की हुई  मान्या  ने समर सिंह से शादी इसलिए कर ली कि वह आई आई टी खड़गपुर से पढ़ा था ,थानेदार का बेटा  था ,दहेज़ की कोई मांग नहीं थी और अमेरिका में अच्छी नौकरी कर रहा था | शादी होते ही समर सिंह ने उसका पासपोर्ट यह कहकर ले लिया कि वह अपने पास सुरक्षित रखेगा और  बहला फुसलाकर उसके  साठ हजार पौंड  भी ले लिए  | यहां तक कि उसे नौकरी भी न करने दिया |  मान्या यह उसका प्यार समझकर उसकी हर बात मानती रही |
 समर सिंह उससे निर्वस्त्र होकर डांस करवाता और उसकी डाक्यूमेंटरी बनाकर अपने मित्रों को दिखाता |  धीरे- धीरे  मान्या को पता चल गया और उसने अपने माँ – बाप को बताया  लेकिन किसी ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया बल्कि  उसे समझाया कि “एक बच्चा कर लो सब ठीक हो जाएगा” | वह  गर्भवती हो गई लेकिन समर का उत्पात कम नहीं हुआ  |
तब उसने  अपने पिता को मेल में लिखा  -“ तुम लोग मेरी अर्थी में फूल चढाने के लिए आओगे क्या ”?
तब  मान्या  के पिता अपनी पत्नी को उसके पास छोड़ आए |
 मान्या   को लड़की पैदा हुई और यह  समर को बहुत नागवार गुजरा |
    मान्या   की माँ ने कहा- “ तुम यहां से किसी तरह निकल कर भारत चलो |अब तुम्हारा यहां पर रहना उचित नहीं है |  तब  मान्या ने अपना पासपोर्ट ढूँढा और जब पासपोर्ट मिल गया तब एक रात जब समर घर पर नहीं था तीनो कार लेकर ऑर्फन सेंटर गईं  लेकिन वहां जगह नहीं मिली तब  मान्या  ने   भारत में पडोसी रह चुके अमर का दरवाजा खटखटाया | अमर ने आश्रय यह सोच कर  दे दिया कि कुछ दिनों में चली जायेगी लेकिन  मान्या  कोर्ट केस लड़ने के लिए दस महीने तक उनके घर रुक गई |क़ानून का शिकंजा कसते  देख समर भारत भाग गया , उसका पासपोर्ट ज़ब्त हो गया और वह अरेस्ट हो गया  | मान्या को तलाक भी मिल गया |
 अमर  की विदेशी पत्नी ने मान्या की  हर तरह से मदद की लेकिन  मान्या   ने उसके साठ  साल के अमीर पिता डेविड से घनिष्ट संबंध  बना लिए |   डेविड तीस साल की मान्या  के प्रेमोन्माद में पागल हो गया था | उसने  मान्या   को शादी का प्रस्ताव दे दिया |
   मान्या   ने  कहा – “तुम जब अपनी पत्नी को तलाक दे दोगे तभी मैं तुमसे शादी करुँगी ”|
चार बच्चों का पिता डेविड ने अपनी पत्नी को तलाक देकर  मान्या   से शादी कर ली |
अमर की विदेशी पत्नी ने दुखी होकर सिर्फ  इतना ही कहा – “ तुमने जिस थाली में खाया उसी में छेद कर दिया | मेरे ही घर में रहकर तुमने  मेरे साथ विश्वासघात किया | ईश्वर तुम्हें कभी माफ़ नहीं करेगा ”|
-डॉ रमा द्विवेदी

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