1- बने मेघ गर तुम,
मैं नीर बनी हूँ ,
जब बरसे गरजकर,
मैं धीर बनी हूँ ।
मैं नीर बनी हूँ ,
जब बरसे गरजकर,
मैं धीर बनी हूँ ।
२- लगाई थी बिंदिया
तेरा नूर लेकर,
तेरे ही लबों की,
मैं लाली बनी हूँ ।
तेरा नूर लेकर,
तेरे ही लबों की,
मैं लाली बनी हूँ ।
३- पिया जाम तुमने
मैं मदिरा बनी हूँ, ,
बहके कदम जब,
मैं संग -संग चली हूँ ।
बहके कदम जब,
मैं संग -संग चली हूँ ।
४- तेरे प्यार से ही,
रोशन है यह दिल,
हुआ जब अँधेरा,
वर्तिका बन जली हूँ ।
रोशन है यह दिल,
हुआ जब अँधेरा,
वर्तिका बन जली हूँ ।
डा. रमा द्विवेदी
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