1- डूबने भी दो
मुझे गम के दरिया में
तुम्हें तो डूबना नहीं आता
डूबने का इल्म
सिर्फ और सिर्फ
मेरे पास है ।

2- मैं बूँद हूँ तो क्या
लेकिन मैं
खुद को आजमाने का
हौसला रखती हूँ
इसलिए तो
विशाल समंदर से
खुद ही मिलती हूँ ।

डॉ रमा द्विवेदी
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Posted by: ramadwivedi | मई 14, 2013

भूल -भुलैया – ताँका

1- भूल -भुलैया
ज़िंदगी -बुनावट
कभी बनती
कभी बिगड़ती है
काल-चक्र में घूमे ।

2- खाली बोतल
फेंक दी जाती है ज्यूँ
प्रेम के बिना
टूटता देह-नाता
उपयोगिता ख़त्म ।

डॉ रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved

Posted by: ramadwivedi | मई 6, 2013

कृष्ण से मिलूँ -हाइकु

1- बाँसुरी हूँ मैं
सात छेद फिर भी
कृष्ण प्यारी मैं

2 -कृष्ण से मिलूँ
सही छेदन पीड़ा
अधर सजी

3 -सात लोक में
विराजित बाँसुरी
उच्च आसन

4- -छेदित वस्तु
प्राय: ही होती त्याज्य
बंशी सौभाग्य

5 – धन्य है भाग्य
बंशी ने जीत लिया
कान्हा का प्यार

डॉ .रमा द्विवेदी

© All Rights Reserved

Posted by: ramadwivedi | अप्रैल 29, 2013

साँसों की सरगम -हाइकु

1-सुनती रहूँ
साँसों की सरगम
लिखती रहूँ

2-युग युगों से
अधूरी प्रेम कथा
बनी है व्यथा

3-फेसबुक में
गज़ब आकर्षण
अज़ब नशा

4-जंगल मौन
सुनाए किसे हम
दिल का दर्द

5 – मछली मरी
तालाब के पानी से
दुनिया डरी

डॉ .रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved

Posted by: ramadwivedi | अप्रैल 23, 2013

भूल भुलैया – हाइकु

1-भूल भुलैया
ज़िंदगी के चौराहे
कहाँ ले जाएँ ?

2- उजाले देता
मुफलिसी में जीता
अँधेरे पीता

3- बिकती कला
कौड़ियों के भाव में
मिट्टी के दीये

4- दीये गढ़ता
प्रकाश भरने को
कुम्हार हूँ मैं

5 – मंजिल नहीं
सफ़र है ज़िंदगी
रुकी तो ख़त्म

डॉ .रमा द्विवेदी
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