Posted by: ramadwivedi | जुलाई 11, 2018

दोहे

1 –
आदिशक्ति जगदायिनी ,सबकी पालनहार |
जग की भवबाधा हरो , जग की तारणहार ||

2 -दुर्गा दुःख विनाशनी ,काली हाथ कपाल |
असुरों को संहारने , धरा रूप विकराल ||

3 -मइया तेरे द्वार पर , आई ले मनुहार |
तेरी कृपा मिले अगर,हो जाऊँ भव पार ||
4 -शक्ति-पुंज से हैं बने , माता के नौ रूप |
नौ दिन के श्रृंगार में , अंबे लगें अनूप ||

5 -जननी को भी मान दें, करें नहीं अपमान |
जगदम्बे खुश हो तभी, देती हैं वरदान ||

*** डॉ. रमा द्विवेदी ***

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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Posted by: ramadwivedi | जुलाई 11, 2018

 दोहे

1 –
बाबाओं के राज को, समझ सका कब कोय ?
सम्मोहित कर लेत जो , उस की जय-जय होय॥

2 -राम कथा का गान कर, बन बैठा भगवंत ।
चरण पकड़ सब बोलते ,जय हो बाबा -संत ॥

3 – कोई आसाराम है , रामपाल है कोय ।
काला धंधा एक है, नाम बदल के होय ॥

4 -संत -राम का चल रहा, योग और  व्यापार ।
लोग बावरे हो गए , जय बाबा करतार ॥

डॉ .रमा द्विवेदी

 

Posted by: ramadwivedi | जुलाई 11, 2018

कुछ दोहे 

1 –
कर्मठ को दुर्लभ नहीं ,सब कुछ है आसान |
करे सार्थक कर्म जो , बनता वही महान ||
2 –
अंतस में संचित सदा , माँ अनुपम अहसास |
प्रेम- त्याग जीवंत छवि , अद्भुत यह प्रतिभास ||
3 –
बातों में आदर्श हो , झूठा हो व्यवहार |
उनसे रखकर दूरियाँ ,करिए राम -जुहार ||
4 –
जीवन में अनुबंध के , टूट रहे तटबंध |
यांत्रिक मानव बन रहा ,बिखर रहे संबंध ||
5 –
अलस भोर उठके करें , फेसबुक को प्रणाम |
सब रिश्ते हैं ताक पर , सबसे प्रिय यह काम ||

** डॉ. रमा द्विवेदी **

 

Posted by: ramadwivedi | जून 29, 2018

नील बरन -मुक्तक

नील  बरन,सुंदर  मृगलोचन , मुरलीधर ने अवतार लिया |
 चुन -चुन कर  दुष्टों को मारा ,भक्तों पर उपकार किया||
बंशी धुन में था  अद्भुत आकर्षण  महारास में डूब गए सब
 गीता -ज्ञान औ कर्मयोग दे , जन -जन  का उद्धार किया ||
**डॉ. रमा द्विवेदी **
Posted by: ramadwivedi | जून 29, 2018

कभी -कभी -दो मुक्तक

होती नहीं मंजूर   सदाएँ  कभी- कभी
बढ़ती ही रहती हैं व्यथाएँ कभी -कभी
ज़िंदगी के दर्द से  न हार जाना तुम
मिलती  हैं ईश की  ही दुआएँ  कभी -कभी |
*****************************
कभी -कभी ही आता है वो
प्रेम का पाठ  पढ़ाता  है वो |
कभी जीत  से , कभी हार से
सबको सबक सिखाता है वो ||
** डॉ. रमा द्विवेदी**

 

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