Posted by: ramadwivedi | अक्टूबर 4, 2018

धोखे कैसे -कैसे -लघुकथा

मिसेज मिश्रा -आजकल शादी के नाम पर क्या -क्या धोखा हो रहा है ? आपने आज के अख़बार में छपी खबर पढ़ी ?
मिसेज सिंह -`नहीं ‘, क्या हुआ ? कैसी खबर ‘?
मिसेज मिश्रा – “ माता -पिता ने अपने इंजीनियर लड़के की शादी एक सुंदर ,पढ़ी -लिखी अच्छी  नौकरी करने वाली लड़की से उसकी मर्जी से करवा  दी | लड़की बंगलौर में काम कर रही थी और लड़का हैदराबाद में | जब भी छुट्टी मिलती लड़की ही लड़के से मिलने हैदराबाद आती ,इस तरह  छै माह  बीत गए और दोनों में पति -पत्नी के संबंध नहीं स्थापित हुए|  लड़का हमेशा उसे दूसरे कमरे में सोने के लिए कहता|  तब लड़की को संदेह हुआ और उसने उसके कमरे की तलाशी ली तब उसे एक ड्रायर में स्त्रियों के  मेकअप का सामान मिला और कुछ स्त्रियों के कपडे भी मिले |  तब उसने उसकी अनुपस्थिति में  `सी सी टी वी’ लगवा कर अपने फोन से कनेक्ट कर लिया और उससे उसे पुख्ता प्रमाण मिला कि वह एक `गे ‘ था | इस रिकॉर्डिंग को उसने  पुलिस  को दिखाकर शिकायत दर्ज की और तलाक की अर्जी फ़ाइल कर दी |  शीघ्र ही  उसे तलाक मिल गया ”|
मिसेज सिंह – “हे भगवान ,कैसा जमाना आ गया है ? क्या माता -पिता को अपने लड़के के बारे में पता नहीं था ?
मिसेज मिश्रा -“ उनका कहना है कि अगर उन्हें पता होता तो शादी ही क्यों करते ”?
मिसेज सिंह – “ आजकल शादी -ब्याह  में कैसे- कैसे धोखे होने लगे हैं ”? इसे समझ पाना अत्यधिक  कठिन है |
** डॉ. रमा द्विवेदी **

 

 

 

 

 

 

 

 

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Posted by: ramadwivedi | अगस्त 31, 2018

विकर्षण -लघुकथा

“तुम शादी कर लो विज ” माँ ने बेटे से कहा |
विज ने कहा -“मुझे शादी नहीं करना ”|
माँ ने कहा -“क्यों नहीं करनी  शादी ? अब तो  तुम सफल अभिनेता हो ,शादी करके घर -परिवार बसा लो ”|
विज ने कहा -“ घर -परिवार बसाने के लिए शादी करना जरुरी तो नहीं है माँ ”|
माँ ने कहा -“ शादी कर लोगे तो घर में बच्चे होंगे और घर में बच्चों से खुशियां आएंगी ”|
विज ने कहा -“ माँ आपको बच्चा ही चाहिए तो मैं आपको बच्चा लाकर दूँगा ,बस शादी  करने की बात कभी न करना ”|
माँ ने कहा -“ मुझे तुम्हारा बच्चा चाहिए ,किसी और का नहीं ”|
विज  ने कहा -“ वह मेरा ही बच्चा होगा ”|
माँ ने पूछा -“ कैसे होगा तुम्हारा बच्चा ”?
 विज ने कहा – थोड़ी प्रतीक्षा करो  और विज  लन्दन  में जाकर सरोगेसी से बच्चा पैदा कर के  माँ को लाकर दे दिया ” |
माँ ने फिर पूछा -“ सच बताना विज तुम्हें शादी करने में रूचि  क्यों नहीं है ”?
विज ने कहा – “  मैं स्त्रियों के संग कोई आकर्षण महसूस नहीं करता बल्कि `विकर्षण’ महसूसता हूँ ” |
  बेटे विज का सच  सुनकर माँ चुप हो  गई |
** डॉ रमा द्विवेदी **
Posted by: ramadwivedi | अगस्त 31, 2018

पूर्वाभास -लघुकथा

पिता ने अपनी बड़ी बेटी से सुबह -सुबह अपने सपने की  बात बताई -“ अपूर्वा    को पुत्र  पैदा हुआ है | तुम्हारी माँ सपने में आकर बोली   कि   वह अपूर्वा  के  घर आ  गई  है | जब मैने पूछा -बारह  वर्षों तक  तुम   कहाँ थीं ? तो कहने लगी मैं कहीं और थी पर वहाँ मेरा मन नहीं लगा | अब में अपूर्वा  के  घर आ गई हूँ | मैं अब उस के  पास ही रहूँगी” |
गाँव में फोन नहीं था इसलिए जब पिता  जी  को अपूर्वा   का पत्र मिला तो पूर्वाभास  की  पुष्टि हो गई और उनका  सपना सच हो गया |
 जब पिता जी  के सपने की  बात पत्रोत्तर  से  अपूर्वा   को  पता चली  तो वह खुद से पूछने लगी  -“ क्या  पूर्वाभास सच होता है, हाँ पूर्वाभास सच होता है ” ?
** डॉ रमा द्वेवेदी **

 

 

Posted by: ramadwivedi | अगस्त 14, 2018

-दोहे –

1 –
जीवन में है छाँव कम, और अधिक है धूप।

काँव-काँव चहु ओर है, मिली न शांति अनूप।।
2 –
तात बिना सूना हुआ ,मेरे मन का गाँव |
  ढूँढा मैंने बहुत पर ,मिली न शीतल छाँव ||
3 –
अम्मा  के न रहने पर  ,खत्म हुई हर आस|
जीवन भर को मिल गया ,नैहर से वनवास ||
4 –

जीवन दे विष पी रही , साँस -साँस  में आह |

माँ की पीड़ा से हुई , संतति लापरवाह ||

5 –

राग- द्वेष ने कर लिया,जीवन पर अधिकार |

अब तो माधव  आइए , डूब रही पतवार  ||

**डॉ. रमा द्विवेदी **

 

 

 

 

 

 

Posted by: ramadwivedi | अगस्त 14, 2018

-कुछ दोहे –

1 –
जीवन में है छाँव कम, और अधिक है धूप।

काँव-काँव चहु ओर है, मिली न शांति अनूप।।
2 –
तात बिना सूना हुआ ,मेरे मन का गाँव |
  ढूँढा मैंने बहुत पर ,मिली न शीतल छाँव ||
3 –
अम्मा  के न रहने पर  ,खत्म हुई हर आस|
जीवन भर को मिल गया ,नैहर से वनवास ||
4 –

जीवन दे विष पी रही , साँस -साँस  में आह |

माँ की पीड़ा से हुई , संतति लापरवाह ||

5 –

राग- द्वेष ने कर लिया,जीवन पर अधिकार |

अब तो माधव  आइए , डूब रही पतवार  ||

**डॉ. रमा द्विवेदी **

 

 

 

 

 

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