Posted by: डॉ. रमा द्विवेदी | सितम्बर 17, 2020

संपादक , मूल लेखक कैसे ?-लघुकथा

``आज मैंने चिरपरिचित विद्वान की एक पुस्तक देखी जिसमें अनेक रचनाकरों की रचनाऍं संकलित थीं लेकिन संपादक की जगह पर लेखक ने अपना नाम लिखा था ,क्या ऐसा होना चाहिए'' ? डॉ. त्यागी ने भाषाविद डॉ. अनुरागी जी से पूछा |
 डॉ अनुरागी ने बताया -`` यह गलत है | संकलन कर्ता संपादक तो हो सकता है लेकिन मूल लेखक नहीं हो सकता | जैसे अनुवादक भी मूल रचनाकार नहीं हो सकता | यह तो सरासर नाइंसाफी है | पूरी किताब अपने नाम कर लेना ,यह तो सिद्धांत की अवहेलना है ''| 
डॉ.त्यागी ने कहा - ``इसलिए ही तो कहते हैं लालच बुरी बला है,विद्वान लोग भी लोभ का संवरण नहीं कर पाते ''| 
**डॉ.रमा द्विवेदी**
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Posted by: डॉ. रमा द्विवेदी | सितम्बर 17, 2020

रिमार्क -लघुकथा

 ``उसकी किताब पर कोई भी छात्रा शोध कार्य करने के लिए राजी नहीं हुई ''| प्रो. रजनी ने अपनी सहकर्मी प्रो. प्रज्ञा ने कहा |
 प्रो. प्रज्ञा ने कहा -``ऐसा क्यों ? उस किताब में तो कई चाटुकारों ने प्रशस्ति गीत लिखे हैं ,फिर क्यों कोई छात्रा शोध नहीं करना चाहती ''?
 प्रो. रजनी ने कहा -`` उस किताब में बहुत ही खुल्लमखुला देह विमर्श वर्णित है और उस पर पहले से ही एक वरिष्ठ ,नामचीन एवं सजग लेखिका ने रेखांकित करनेवाला रिमार्क लिख दिया और वह रिमार्क छपकर सार्वजनिक हो गया है इसलिए उस पर कोई छात्रा शोध नहीं करना चाहती ''|
 प्रो. प्रज्ञा ने कहा -`` सच है किसी नामी समीक्षक का एक रिमार्क भी किसी का बेडा गर्क करने के लिए पर्याप्त हो सकता है ,अतः हम सभी को बहुत ही सोच समझ कर ही रिमार्क देना चाहिए ''|
 **डॉ. रमा द्विवेदी**
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Posted by: डॉ. रमा द्विवेदी | सितम्बर 17, 2020

श्रृंगार की जरुरत क्या है ? -लघुकथा

``कोरोना ने तो हमारे सौंदर्य का सत्यानाश कर रखा है'' | सुंदरी ने अपनी सहेली सुदेष्णा से कहा | सुदेष्णा ने पूछा - `` वो कैसे ? अब तो लॉकडाउन खुल गया है,अब क्या समस्या है ''? 
सुंदरी ने कहा -`` लॉक डाउन खुल गया तो क्या ? कही जाने पर मास्क तो लगाना ही पड़ेगा ? आज जब मैंने पति महोदय से कहा कि मुझे ब्यूटी पार्लर जाना है ,पाँच हजार रूपये देकर जाना तो कहने लगे कि अब ब्यूटी पार्लर जाने और श्रृंगार करने की जरुरत क्या है ? फालतू खर्चा बंद करो | मास्क लगाने के बाद वैसे भी कोई नहीं देखेगा ? 
जब मैंने कहा कि तुम तो देखोगे न ? तब उत्तर मिला कि घर में भी मास्क लगा कर रखना तो मैं भी न देखूँगा और न कुछ सुनूँगा ''?
 सुदेष्णा उसकी बात सुनकर जोर- जोर से हँसने लगी |
 ** डॉ.रमा द्विवेदी **
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Posted by: डॉ. रमा द्विवेदी | सितम्बर 15, 2020

हमला -दोहे 

1- 
 छुपकर करता वार जो,करें नहीं विश्वास | 
बच करके हरदम रहें,रखें न कोई  आस ||

  2-
 हमला सीमा पर  करें,रहें न चुप जांबाज |
 वीर सैनिकों पर हमें,सदा रहेगा  नाज़ ||
 
3 -
आ जाता जो शरण में,करें न उन पर वार।
शांति वार्ता से सदा, ढूंढे हम परिहार।।
 4-
प्रेम पुजारी हम रहे,मानवता से प्यार ।
पर जो करता आक्रमण,लेते हैं प्रतिकार।।
5-
 नाम चीन कैसे बचे,रहे न तू आज़ाद।
तुझ पर होंगे आक्रमण,रहे न अब आबाद।।

** डॉ.  रमा द्विवेदी**

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Posted by: डॉ. रमा द्विवेदी | सितम्बर 15, 2020

मैं हूँ वर्षा की रुनझुन – गीत

मैं हूँ वर्षा की रुनझुन हँसाती हूँ मैं
पास आकर तेरे गुनगुनाती हूँ मैं |

हो बहुत तुम बड़े
वर्षों तन कर खड़े
आज पतझड़ है पर
फिर भी जिद पे अड़े
पास आकर तुझे गुदगुदाती हूँ मैं |
मैं हूँ वर्षा की रुनझुन हँसाती हूँ मैं |

मन में दुख हो गहन
सूख जाए यह तन
न बची आस हो
और न कोई जतन
मृत उमंगों को फिर से जगाती हूँ मैं |
मैं हूँ वर्षा की रुनझुन हँसाती हूँ मैं |

संग -संग हम चले
राहों में गम मिले
न हों शिकवे -गिले
दिल से दिल जो मिले
प्रेम-संगीत सबको सुनाती हूँ मैं |
मैं हूँ वर्षा की रुनझुन हँसाती हूँ मैं |

**डॉ. रमा द्विवेदी **

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