Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 12, 2017

मैं द्रौपदी नहीं हूँ -लघु कथा

 

सत्रह साल की प्रज्ञा  की शादी  माता -पिता ने एक अच्छा पढ़ा लिखा लड़का देख कर कर दी | प्रज्ञा पति के घर आ गई ,कुछ ही दिन में पति धर्मपाल पढाई करने के लिए वापस चला गया |
प्रज्ञा को अपने देवर और ससुर के साथ अकेले गाँव में रहना पड़ा ,घर में कोई औरत नहीं थी और न कोई बाहर की औरत घर में आ सकती थी” | ससुर पहरेदार की तरह दरवाजे पर बैठे रहते थे |
पति की सख्त  हिदायत थी कि -“मेरे भाई और पिता को किसी तरह की तकलीफ नहीं होनी चाहिए,उनका हर काम करना ” |
“प्रज्ञा क्या करती ,उसने हामी भर दी” |
“प्रज्ञा को अकेला पाकर उसका देवर  उसके साथ भद्दी हरकतें  करने लगा ,उसने उसे समझाने  की बहुत कोशिश की लेकिन वह उसे धमकाने लगा कि अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुम पर इलज़ाम लगा कर अपने भाई से तुम्हें पिटवाऊंगा ”|
 “प्रज्ञा  उसकी यह बात सुनकर  अंदर से डर जाती लेकिन  डर को जाहिर न होने देती ” |
पति को बताने की कई बार कोशिश की लेकिन उसका उत्तर होता `क्या तुम हमारे घर को तोडना चाहती हो , जो भी हो तुम्हें वहीँ रहना है ”?
प्रज्ञा सोचती -“किसी को कैसे बताए ? गाँव में नई बहू  कुछ कह दे कि बात का बतंगड़ बनाकर  उसे ही दोषी करार दे दिया जाता है”  |
वह देवर से बहुत सतर्क होकर रहने लगी |
एक दिन धर्मपाल कुछ दिन की छुट्टी में घर आया |
प्रज्ञा ने उसके भाई के द्वारा लिखे गए प्रेम पत्र प्रमाण के रूप में रखकर बताया लेकिन यह क्या ?
धर्मपाल ने कहा -“वह अभी बच्चा है ,अगर यह सच भी  है तो क्या हुआ ,सब चलता है ”|
धर्मपाल का यह उत्तर सुनकर वह अवाक रह गई और उसने पूरी दृढ़ता से कहा -“ मैं द्रौपदी नहीं हूँ ,जो तुम्हारे कहने से दांव पर लग जाउंगी  ,मैं अपने आत्मसम्मान की  रक्षा स्वयं करुँगी ”|
**डॉ रमा द्विवेदी **

 

 

 

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Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 2, 2017

“उसे क्या हुआ था” ? -लघु कथा

 

 

नवयुवक रामू भीमावरम से हैदराबाद पैसा कमाने के लिए आया |छरहरे बदन का सुघड़ -सुंदर , मेहनती और शालीन लड़का था | पत्नी भी साथ थी और पांच- छै वर्ष का एक लड़का भी था | दोनों पति -पत्नी घरों में काम करते थे और जो अतिरिक्त समय मिलता लोगों के कपड़ों में इस्त्री करके भी पैसा कमाते थे | रामू जो भी काम करता बहुत ही सलीके से करता था इसलिए बहुत कम समय में वह स्त्रियों के बीच चर्चित हो गया था | जब भी किसी को जरुरत पड़ती लोग काम करवाने के लिए रामू को बुला लेते |मैं भी उसे अतिरिक्त साफ़ सफाई के लिए बुला लेती थी | वह बहुत आकर्षक रंगोली डालता था और बिना कहे हमारी गली के सभी अपार्टमेंट के गेट पर देर रात रंगोली डाल देता किसी को कुछ बताता भी नहीं लेकिन उसकी इस कला से सभी परिचित थे | वो किसी से काम के ज्यादा पैसे भी न मांगता जो कोई जितना उसे दे देता वह ले लेता | उसे सोने के गहने पहनने का शौक था और गहने भी वो स्त्रियों के डिजाइन वाले पहनता था | गले में चेन ,हाथ में कई अंगूठियां और कड़ा भी पहने रहता था | पैंट के लेफ्ट साइड में स्त्रियों की तरह रुमाल खोंसे रहता था |
एक दिन मैंने उससे पूछ ही लिया -“रामू तुम यह सब क्यों पहनते हो ”?
उसने हँसकर कहा -“ मुझे पसंद है ”|
उसका उत्तर सुन मैं भी चुप रह गई |
एक दिन मैंने देखा कि “वह साड़ी -ब्लाऊज पहने है और बाल लम्बे करके जूड़ा बनाकर क्लिप लगाए हुए है |माथे पर तिलक, हाथों में चूड़ियां और गले में माला पहने हुए है | लोग उसे देख कर हँस रहे हैं | किसी ने मुझे बताया कि उसकी बीबी उसे छोड़कर चली गई है | लोगों ने बताया कि देर रात कुछ युवक आकर उसे कार में ले जाते हैं और छोड़ जाते हैं | वह कब सोता -जागता था, यह पता नहीं क्योंकि कभी -कभी वह दो -तीन बजे रात में आकर डोरबेल बजा देता और कहता मैं काम करने आया हूँ | लोग उसे डांटकर भगा देते” |
“कुछ समय तक वह स्त्रियों की अलग -अलग वेशभूषा में दिखता रहा फिर एक रात मैंने देखा कि सामने के अपार्टमेंट से जोर जोर से आवाजें आ रही हैं | मैंने चौकीदार से पूछा कि यह क्या हो रहा है” ?
उसने बताया -“रामू कम्पाउंड वाल फांद कर आने की कोशिश कर रहा था इसलिए उसे मार रहे है ”|
इस घटना के बाद रामू लापता हो गया | मेरा मन आज भी यह नहीं भूल पाता कि “उसे क्या हुआ था जो उसका मानसिक संतुलन खो गया ” ?

डॉ रमा द्विवेदी

 

Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 2, 2017

खरीदी हुई औरत हो -लघु कथा

मामी जी ,आपकी उम्र  बहुत कम और मामा जी बहुत बूढ़े हैं  ,आपने यह शादी कैसे कर ली ?  रिश्ते में मामी सास से अनुसुइया ने पूछा |
मामी जी ने बड़ी  ही उदासीनता से उत्तर दिया – “बूढ़े से शादी न करती तो क्या करती ” ?
अनुसुइया ने कहा-“ ऐसी क्या मजबूरी थी” ?
मामी जी  ने कहा “क्या करोगी जानकर” ?
अनुसुइया ने कहा आप निश्चिन्त होकर बताइये -“मैं किसी से नहीं कहूँगी” |
मामी जी  ने बताया -“ मैं विलासपुर की हूँ | अत्याधिक गरीबी के कारण मेरे माता -पिता ने मुझे इनके हाथों बेंच दिया ,मैंने  तब यह सोचा कि  चलो गरीबी से मुक्ति मिली लेकिन जब मैंने देखा कि मेरी शादी बहुत बूढ़े व्यक्ति से की जा रही है तब मैंने विरोध किया था- “मैं यह शादी नहीं करुँगी और उनके छोटे भाई जो उनसे लगभग पंद्रह वर्ष छोटे थे उनसे शादी करने की इच्छा जाहिर की लेकिन किसी ने मेरी एक  न सुनी |
तब मैंने भागने की कोशिश की | मौका देख कर मैं खेतों में लोटा में पानी लेकर शाम के झुरमुटे में संडास   के बहाने गई और भाग खड़ी  हुई|
  “अभी मैं कुछ ही दूर गई थी कि  मुझे पकड़ लिया गया और मार -पीटकर कमरे में बंद कर दिया गया ,दो दिन तक भूखा रखा गया ”|
 मज़बूरी में   मैंने शादी के लिए हाँ  कर दी तब  मुझे यह कह कर मुक्त किया गया -“ तुम खरीदी हुई औरत हो ,जैसा हम चाहेंगे तुम्हें करना पड़ेगा,,भागने की फिर कोशिश की तो  जान ले लेंगे  ”|
मामी जी के ये मार्मिक शब्द -“तुम खरीदी हुई औरत हो ” मेरे दिमाग में आज  तक हथौड़े मारने जैसा प्रहार करते हैं |
***डॉ. रमा द्विवेदी ***
Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 29, 2017

सरसी छंद

1 –
वाह वाह ही सब करते हैं ,कविता हुई  फरार | 
फेसबुक ने दिया है सबको ,कैसा यह  संसार ||  
अपने मन की  लिखते हैं सब , नहीं छंद का नाम|  
जाने कैसे बिक  जाते हैं , बिन  सुगंध के  आम || 
 
2 –
झूठी शान कमाने खातिर  ,ठगे गए कवि लोग | 
 कविता पढ़ने का विदेश में  ,लगा विकट  यह रोग ||
 ठगा -ठगी के  खेल खेल के  ,हारे  कई हजार |
 झांसा देकर हुआ लापता , बैठे अब  मन मार ||
 
– डॉ. रमा द्विवेदी 

 

Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 29, 2017

एक्सचेंज मैरिज-लघु कथा 

 

 

मेरी एक सहकर्मी उमा ने बताया कि -“”उसके भाई और बहिन की एक्सचेंज मैरिज है ”|
मैंने  पूछा- “ऐसा क्यों किया” ?
उसने कहा – “दहेज़ से बचने के लिए” |
मैंने फिर पूछा -“क्या तुम्हारे भाई -बहिन  इस  शादी से खुश हैं ”?
उसने कहा -`नहीं ‘ मेरी बहिन वाणी की उसके पति श्रीनू से किसी बात को लेकर अनबन हो गई और बात तलाक पर ख़त्म हुई और इस तलाक का प्रभाव  भाई -भाभी के रिश्ते पर भी पड़ा और मेरे भाई ने मेरी भाभी को बेवजह त्याग  दिया जबकि उनके एक तीन साल का बच्चा भी था ”|
दोनों ने तलाक नहीं लिया, न दूसरी शादी की , बस अलग  हो गए |
पंद्रह साल के बाद एक दिन अचानक वह मुझे मिली ,मैंने उससे उसके भाई -बहिन के बारे में पूछा -“तुम्हारे भाई ने शादी की या नहीं  , उसने खुश होकर कहा -“नहीं ,पर उनके बेटे ने माता -पिता में सुलह करवा दी है ”|
उसका उत्तर सुनकर मैं भी प्रसन्न हो गई ,“ज़िन्दगी के बहुमूल्य पंद्रह  वर्ष अलग -अलग रह कर वनवास में कट गए  पर “देर आये दुरुस्त आए”    |
*** डॉ. रमा द्विवेदी ***

 

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