Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 29, 2016

खुदी में फिर समाता है -मुक्तक

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Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 21, 2016

बहुत वो हसीन लगता है-मुक्तक

कोई सीधा ,कोई सादा  , कोई शौक़ीन लगता  है
किसी की बात में तल्खी , कोई ग़मगीन लगता है ।
किसी को दोस्ती प्यारी ,किसी की  दुश्मनी न्यारी
जो खुशियाँ ही लुटाता है, बहुत वो हसीन लगता है ॥
-डॉ. रमा द्विवेदी
Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 21, 2016

ग़ज़ल कहता कोई इसको-मुक्तक

ग़ज़ल कहता कोई इसको ,कोई इसे गीत कहता है

कोई इसे गीतिका कहता, कोई इसे प्रीत कहता है ।

इसी से दिल की बस्ती है , इसे तुम भी समझते हो
जो दिल में प्यार रखता है, इसे वो मीत कहता है॥
डॉ रमा द्विवेदी

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