Posted by: ramadwivedi | अगस्त 17, 2019

देश की छबि मिट्टी में -लघुकथा

दो चिंतक आपस में बात कर रहे थे | एक चिंतक ने कहा आज मैंने एक विडिओ देखा , जो इस प्रकार है –
एक भारतीय संभ्रांत परिवार `बाली’ (इंडोनेशिया ) के पांच सितारा होटल  में ठहरा  और चेक आउट के समय होटल की सारी सुविधा की वस्तुएं जैसे साबुनदानी ,स्प्रे ,साबुन, शैम्पू , तौलिया ,मॉइस्चराइजर बोटल आदि -आदि सूटकेस में छुपा लिए ,जब सिक्योरिटी चेकिंग हुई तब सारी वस्तुएं निकली तब  होटल वालों ने वीडिओ बनाकर  भारतीय लोगों की मानसिकता का लाइव टेलीकॉस्ट  दिखाया |
“तब परिवार के सदस्य कहने लगे प्लीज इस तरह तमाशा मत दिखाइए हम इन सब वस्तुओं की कीमत चुका  देंगे ,चाहे इनकी कीमत पचास लाख ही क्यों न हो ”? होटल वालों ने उनकी  एक बात भी न सुनी और बुरी तरह से अपमानित किया |
दूसरे चिंतक ने कहा – “ पचास लाख देने की ही औकात थी  तो ये  सब चीजें चुराई ही क्यों ? ऐसी ही घटिया मानसिकता के लोग देश की छबि मिट्टी में मिलाते हैं”|
पहले चिंतक ने बड़े क्षोभपूर्वक  कहा -“ धिक्कार है ऐसी मानसिकता पर जो देश की इज्जत का भी ध्यान नहीं रखते ”|
** डॉ. रमा द्विवेदी **

 

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Posted by: ramadwivedi | अगस्त 17, 2019

वर्षा पर दोहे

1 –
जलप्लावित हो रो रही , है ऐसी  बरसात  |
 मेघों ने देखो  किया , धरती पर  उत्पात ||
**डॉ. रमा द्विवेदी **
2 –
खेती -बाड़ी और घर ,डूब गए हैं धान |
कोप देखकर मेघ  का ,रोया बहुत किसान ||
3-
छाता लेकर चल पड़े ,राशन की दूकान |
पक्षी बैठे दुबक कर ,उगा  नहीं दिनमान ||
4 –
चपला लप -लप कर रही ,घन -घन घन आवाज |
ऐसा अनुभव  हो  रहा , गिरी कहीं पर गाज ||
5 -उफन -उफन नदिया बहे , नृत्य कर रहे ताल |
  आया जल- सैलाब यूँ  , सागर भरे उछाल ||
6 –
जलप्लावन से हो रहा ,चहुँदिशि हाहाकार |
त्राहि -त्राहि हर ओर  है ,कृपा करो करतार ||
**डॉ. रमा द्विवेदी **

 

Posted by: ramadwivedi | अगस्त 17, 2019

मुक्तक

कह गए चतुर  सुजान ,  बात  तुम सच्ची करना  ।
चाहे हों जैसे भी  हालात, बात तुम सच्ची  करना ।।
लाख टके की हो हर बात यही  संकल्प सदा  हो
किसी को न देना आघात,बात तुम सच्ची करना ।।
**डॉ. रमा द्विवेदी **

 

Posted by: ramadwivedi | अगस्त 17, 2019

स्वतंत्रता दिवस पर दोहे

1-

सात दशक के में ही सही , मना  रहे हैं जश्न।

देश विरोधी हैं बहुत, उठा रहे हैं प्रश्न।।
2-
भारत माता खुश बहुत, पहन शीश पर ताज।
दुनिया के इतिहास में, देश बना  सरताज ।।
3-
मोदी जी ने रच दिया, एक नया  इतिहास ।
 केशर – केसरिया- हरा , मना रहे मधुमास ।।
4-
खो करके कश्मीर को, हुआ पाक बेहाल ।
कोई अब सुनता नहीं , पागल करे बवाल ।।
** डॉ. रमा द्विवेदी **
Posted by: ramadwivedi | जुलाई 23, 2019

परहित सरस धर्म नहिं दूजा

परहित सरस धर्म नहिं दूजा , लेना यह संज्ञान |
पर-पीड़ा को समझ सका जो ,वो ही है भगवान् ||
सरवर जल नहिं पीता खुद ,तरुवर फल नहिं खाय
जगहित में ही सूरज जलकर , देता है यह ज्ञान |
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परहित सरस धर्म नहिं दूजा ,मानस में तुलसी ने गाया |
समझी जिसने पीर पराई , उसके मन में प्रेम समाया ||
प्रेम बिना नहीं सृष्टि चलती , वेद – पुराणों ने बतलाया |
जब -जब प्रेम घटा जगती में ,कृष्ण ने गीता ज्ञान सुनाया ||

** डॉ. रमा द्विवेदी **

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