Posted by: ramadwivedi | मई 24, 2018

बंधुआ छोटू -लघुकथा

रोज देर रात मैं अपनी बालकनी से देखती ,एक आठ – नौ साल का मैला -कुचैला बालक बर्तन धोता रहता था | उसे देखकर मुझे बहुत  तरस आता था कि इतना छोटा बालक देर  रात तक अकेले काम करता रहता है  ? इसका बालमन कितना तड़पता होगा ? कैसे माता पिता हैं जो  स्कूल जाने की उम्र में   बच्चों को कुछ पैसों  के लिए बंधुआ मजदूर बना देते हैं ? पाल नहीं सकते तो पैदा ही क्यों करते हैं ? ऐसे ही अनेक प्रश्न दिमाग को झकझोरने लगे |
 एक दिन बातों -बातों में मैंने अपनी पड़ोसन सुजाता  से पूछ ही लिया -“ यह बालक  आपको कहाँ से मिला” ?
वह गर्व से सर  झटकते हुए बोली -“छोटू को  हम इसके माँ -बाप को पच्चीस हजार रुपए  देकर गाँव से लाए हैं  | यह पांच वर्ष तक इतने  पैसों  में ही काम करेगा ” |
मुझे प्रेमचंद की कहानी “सवा सेर  गेहूं ” याद आ गई | बाल बंधुआ मजदूर रखना एक संगीन अपराध है और कानून को धता बताकर आज भी लोग यह अपराध कर रहे हैं,क्यों ” ??
** डॉ. रमा द्विवेदी **

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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Posted by: ramadwivedi | मई 24, 2018

इच्छा मृत्यु – लघुकथा 

पत्नी ने कहा -“ सुनते हो अब तो `इच्छा मृत्यु’ का क़ानून भी बन गया है ,,,,,,,आपके पापा वर्षों से बिस्तर पर  हैं  ……………….और अल्जाइमर से  भी पीड़ित  है ………………..!!

पति ने बोला  -“ठीक कह रही हो | कुछ सोचता हूँ ”|
पत्नी बोली  “ आप तो बहुत समझदार हैं ,मेरे मन की बात बिना कहे ही जान गए ”|
पति ने कुटिलता से मुस्कुरा कर  कहा – “ तुम्हीं से सीखा है जानेमन ! दोनों प्लान बनाने में व्यस्त हो गए” |
**डॉ. रमा द्विवेदी **
Posted by: ramadwivedi | मई 24, 2018

लाइफ पार्टनर -लघुकथा

 अमेरिका में बिटिया  ने   दो विदेशी महिलाओं को डिनर पर बुलाया था जिसमें एक महिला उसकी `ट्रेनिंग टीचर ‘ थी  |  रायना  चुस्त -दुरस्त  ,लम्बी छरहरे बदन की थी और  लिसा बहुत अधिक गोरी ,नाक -नक्श से बहुत सुन्दर – कोमल और  सुडौल बदन की थी |
डिनर करके  जब दोनों  जाने  लगी तब  मेरी  बिटिया  ने उनसे पूछा -“ कुछ खाना  पैक करके ले जाइये ,उन्होंने हाँ कर दिया ”|
मैं उन दोनों  के लिए खाना  अलग -अलग पैक करने लगी | तब बिटिया  ने कहा -“ एक में ही पैक  कर दो | दोनों साथ रहती हैं” |
जब वे चली गईं तब मैंने बिटिया  से पूछा -“ ये दोनों बहिने  हैं  क्या ”?
बिटिया  ने बताया – “ समलैंगिक लाइफ पार्टनर हैं ”|
मैंने प्रश्न किया-“ ऐसा क्यों ? लिसा  इतनी सुंदर है कि फूल के स्पर्श  से मुरझा जाए| उसने शादी क्यों नहीं की ” ?
बिटिया ने उत्तर दिया – “लिसा ने शादी की थी पर  उसका पति उसे अनेक प्रकार की शारीरिक और मानसिक  यातनाएँ  देता था इसलिए उसने तलाक ले लिया और मानसिक  दहशत के कारण इस रिश्ते में आ  गई  | वैसे  इस सम्बन्ध  को यहाँ कानूनन मान्यता प्राप्त  है और  कोई  हेय दृष्टि से भी नहीं देखता   ” |
** डॉ रमा द्विवेदी **
Posted by: ramadwivedi | अप्रैल 6, 2018

हम करब – लघुकथा 

पति – “सुनत  हो ,कल से हम  नवरात्रि के उपवास करब  | खाने का सब  का प्रबंध कर  लीन्हौ है न | कुछ अउर सामान  लाना है का ”?

पत्नी – “तुम न करौ नवरात्रि के उपवास” |
पति – “काहे न करब” ?
पत्नी – “तुम्हार   उपवास करन से हमार काम बहुत बढ़ जात है | हमार समय दिनभर रसोई बनावन में और बर्तन धोवन में बीतत है | तुम्हार बदले हम व्रत रख लेब’ |
पति -“ तुम कछु न खइबो  का ”?
पत्नी – “ हम दूध -फल  खाकर रहि जाइब | संझा  में एक टेम  साबूदाना की खिचड़ी और दही  खा लेब |  हमार टेम  और  श्रम तो बचिहै न” |
पति – “ साबूदाना  का खिचड़ी ? यह भी कौनौ उपवास का खाना है  ”?
पत्नी -“ खिचड़ी राष्ट्रीय व्यंजन है और अत्यंत स्वास्थ्यवर्द्धक है इसलिए अब से तुम न करौ उपवास ,हम करब” |
पति – “ पति अनमना हो  निरुत्तर  हो गया ”|
** डॉ रमा द्विवेदी **

 

Posted by: ramadwivedi | अप्रैल 6, 2018

उपवास  -लघुकथा 

 

 

 

 

ग्राहक –“ पंद्रह किलो सिघांड़े का आटा ,दस किलो कुट्टू का आटा ,दो किलो मखाना ,दो किलो घी ,पांच किलो चीनी ,एक किलो काजू और आधा किलो किसमिस,,,,,,,,,,,,,,,,,, इत्यादि दे दो ”| दुकानदार से ग्राहक ने कहा |

दुकानदार आश्चर्य से बोला -“साहब इतना सारा उपवास के सामान का क्या करेंगे ”?
ग्राहक -“ घर में  चार लोग उपवास रखेंगे तो दिनभर कुछ न कुछ बढ़िया -बढ़िया पकवान   बनाकर खायेगे ही | भूखे रहकर  नवरात्रि के नौ दिन के उपवास कैसे करेंगे ”?
 दुकानदार – ग्राहक के जाने के बाद बड़बड़ाता रहा | “व्रत कर रहे हैं या  उपवास के नाम पर दावत उड़ा  रहे है और इसे देवी माँ की भक्ति कह रहे हैं| जय हो माता रानी की | कैसे -कैसे भक्त है माँ ”?
**डॉ रमा द्विवेदी **

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