Posted by: ramadwivedi | जनवरी 17, 2018

हँसना मना  है-लघुकथा 

मेरी पड़ोसिन सरस्वती ने बातों- बातों में आज बताया कि  “उसके पति को हँसना पसंद नहीं है” |

सुनकर मुझे  बड़ा आश्चर्य हुआ |“ पढ़ा लिखा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ,बड़े पद पर कार्यरत है | फिर भी इतना गंभीर क्यों रहता है” ?
सरस्वती ने बताया कि बिना उसकी परमीशन के घर में कोई काम करने वाला  नहीं आ सकता  | वह कितनी भी बीमार हो उसके लिए उसे खाना बनाना ही पड़ता है ,वह किसी के हाथ का बनाया  खाना नहीं खाता  , यहाँ  तक कि टेबल से पानी का गिलास भी उठाकर नहीं पीता  | वह अपने माता पिता के घर भी एक दिन नहीं रुक सकती ,अगर कभी रुक जाए तो बोलता है “क्यों आई हो ,वही रहो ”|
 बीमार  हो जाए तो डॉक्टर को जरूर दिखायेगा लेकिन देखभाल नहीं करेगा ,बोलेगा “अपनी माँ को बुला लो” |  अपनी बड़ी  होती  दोनों बेटियों से भी कभी भी हँसकर बात नहीं करता पर पढ़ाई की या उनकी जो भी मांग हो तुरंत पूरी करता है |
सरस्वती के लिए  दीवाली के समय चार-चार  लाख के स्वर्ण आभूषण खरीदता है | घर का स्टेटस बहुत अच्छा रखता है | वैसे बहुत जिम्मेदार है लेकिन हँसने पर गुस्सा करता है |
मैंने कहा -“इतनी पाबंदियों में तुम कैसे रहती हो ”?
उसने हँस कर उत्तर दिया “क्या करना ,रहना पड़ता है ,जब हँसने का मन होता है तब सामने रह रही  अपनी भाभी के घर चली जाती हूँ ”|
मैंने सोचा “औरत को घर में शांति बनाए रखने के लिए क्या -क्या  संतुलन बनाना पड़ता है | अब देखो “हँसना भी मना है ” ?
**डॉ रमा द्विवेदी**

 

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Posted by: ramadwivedi | जनवरी 17, 2018

प्रेम पर कोहरा घना है-नवगीत

 

 

 

 

बेरुखी का दृश्य यह
कैसा तना है
अर्थ में ही लिप्त हैं सब 
प्रेम पर कोहरा घना है।

मार महँगाई की
सब पर पड़ रही है
ख्वाहिशों की मांग
पल -पल बढ़ रही है।
उत्सवों ने जीना भी
दूभर किया है ।
होंठ सीं  लो
बोलना भी तो मना है ।
प्रेम पर कोहरा घना है ।।

बात वे अब प्यार से
करते नहीं हैं
फूल शब्दों से अभी
झरते नहीं हैं।
मुँह फुलाए बैठे
कुछ कहते नहीं हैं।
जंग है शीतल मगर
मन अनमना है।
प्रेम पर कोहरा घना है ।।

**डॉ. रमा द्विवेदी**

Posted by: ramadwivedi | दिसम्बर 16, 2017

गिरावट -लघु कथा

 

डॉ ठाकुर ने बेटी की विदाई होते ही सभी रिश्तेदारों के सामने घोषणा कर दी कि “मैं दूसरी शादी करना चाहता हूँ” |
सब लोग आश्चर्य चकित रह गए ,यह क्या कह रहा  है ?
सबने ठाकुर को समझाने की कोशिश की लेकिन उसने किसी की न सुनी | “उस पर तो प्यार  का भूत  सवार था ”|
मिसेज ठकुराइन के तो  होश उड़ गए ,उसने तो कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि जिस पति की वह पच्चीस वर्षों से तन -मन -वचन से सेवा कर रही है ,वह सबके सामने उसका इतना अपमान करेगा ? वह जिससे शादी करना चाहता है वह उसकी असिस्टेंट है और कई वर्षों से उसके सम्बन्ध उससे रहें हैं लेकिन  सब जानते हुए भी उसने कभी कुछ इसलिए नहीं कहा कि बच्चों पर गलत असर पड़ेगा”  |
उसने हिम्मत जुटा  कर  सिर्फ इतना ही कहा -“ मैं इस उम्र में कहाँ जाऊँगी  ”?
 डॉ ठाकुर ने कहा- “ मैं तुम्हारे रहने और खाने पीने का इंतज़ाम कर देता हूँ | अगर तुम रहना चाहो तो अलग रहो या अपने मायके चली जाओ  और हाँ  लड़का मेरे साथ रहेगा जब तक वह पढ़ लिखकर   नौकरी नहीं करने लगता ” |
ठकुराइन सोचने लगी -“ क्या मैंने इस आदमी को रोज  बादाम गिरी  इसलिए खिलाई थी कि अपनी मर्दानगी मुझ पर ही  निकाले ? किसी की सोच में इतनी गिरावट कैसे  आ सकती है ,सहसा वह विश्वास न कर सकी  ?
–डॉ रमा द्विवेदी

 

 

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