Posted by: डॉ. रमा द्विवेदी | जुलाई 10, 2021

दो क्षणिकाएँ

1-
अब गम का मरहम 
उदासी,ख़ामोशी या
आँसू बहाना नहीं 
फेसबुक और सेलफोन
दुःख-दर्द-पीड़ा को
भुलाने तक का 
अचूक मरहम हो गया है|
 2-
न्यूकिल्यर परिवार में
मातम के समय में भी
कुछ ढाँढस,कुछ सहानुभूति
या आत्मीयता के कुछ शब्द 
अब हमारे पास बचे कहाँ हैं?
सिवाय इसके कि -
सेल फोन या फेसबुक में
अलग-अलग कोने में बैठ
नज़रें चुराने के सिवा | 

*डॉ. रमा द्विवेदी *
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Posted by: डॉ. रमा द्विवेदी | जुलाई 10, 2021

विविध दोहे

1-
मन में प्रभु का नाम ले,करना सदा प्रयास|
पूरण हो हर कामना,रखना यह विश्वास||  
2-
माया-मद अरु मोह की,कभी न रखना चाह| 
इसमें फँसकर ही मनुज,बनता लापरवाह||
 3-
राम भक्ति की कामना,हृदय राम का वास|
फलित सभी संकल्प हों,रखना यह विश्वास||
 4-
जिसकी जैसी आरजू ,जैसा करें प्रयास| 
सफल वही होते जिसे,खुद परहो विश्वास||
 5-
सुंदर हो यदि कामना,कोशिश हो भरपूर|
जीवन उसका खुश रहे,मुख पर रहता नूर||
 6-
मन की चाहत अति प्रबल,लगती कहाँ लगाम|
होनी तो होकर रहे,रोक सके कब राम? 

 ** डॉ. रमा द्विवेदी **
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Posted by: डॉ. रमा द्विवेदी | जून 25, 2021

स्वतंत्र जीवन-लघुकथा 

"हमें आपका घर किराए पर चाहिए"|आगंतुक लड़के ने कहा|
  मैंने लड़के के साथ लड़की को देख पूछा-"आप दोनों पति-पत्नी हो"?
लड़के ने लड़की की ओर देख कर कहा-"हम दोनों पति-पत्नी जैसे ही हैं"|
 "पति-पत्नी के जैसे ही हैं का क्या मतलब?क्या तुम दोनों की शादी नहीं हुई अभी"? मैंने पूछा|
 "नहीं|दरअसल हम शादी करना भी नहीं चाहते,पर हम दोनों साथ रहकर न केवल जीवन गुजारना चाहते हैं बल्कि संतान भी करना चाहते हैं"| लड़के ने उत्तर दिया|
  मैंने बड़ी सहजता से पूछा -"शादी क्यों नहीं करना चाहते?संतान तो शादी के बाद ही करनी चाहिए"?
"वास्तव में शादी करके हम सामाजिक बंधनों में नहीं बंधना चाहते और अगर हम दोनों में से किसी एक की मृत्यु हो जाए तो न मैं विधवा हूँगी और न ये विधुर होगा और हाँ हमारे ऊपर घर- परिवार एवं समाज की रूढ़ि परम्पराओं का भी किसी प्रकार का दबाव नहीं होगा तथा हम स्वतंत्र जीवन जी सकेंगे"|  इस बार उस लड़की ने बेहिचक उत्तर दिया |
  लड़की का इतना स्पष्ट उत्तर सुनकर आश्चर्यचकित हो मैं गंभीर प्रश्नों में उलझ गई| 

*डॉ.रमा द्विवेदी*
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Posted by: डॉ. रमा द्विवेदी | जून 25, 2021

नेह का सम्बल -मुक्तक 

1-
तुम्हारे नेह का  संबल , प्रभु इक बार मिल जाए
कई जन्मों का प्यासा हूँ , सुधा  रसधार  मिल जाए|
सभी कहते कृपालु तुम हो भक्तों के भी रखवाले
मेरे इस डूबते मन को , कृपा -आगार मिल जाए।।
2 -
कन्हैया की कृपा का गर,सहारा मिल गया होता
मेरे मन के सभी अवगुण,कलुष सब धुल गया होता।
हे भक्तों के तरण- तारण,भँवर में है मेरी कश्ती 
मुझे दे देगें यदि संबल,किनारा मिल गया होता।।

  ** डॉ.रमा द्विवेदी**   
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Posted by: डॉ. रमा द्विवेदी | जून 16, 2021

आस -पास -दोहे 

1-
 आस-पास सब हैं मगर,कोई नहीं करीब।
 दिल के हो यदि पास जो,उसके बड़े नसीब।।
2-
आस-पास रहते हुए,नहीं पूछते हाल।
हे प्रभु ऐसा क्यों हुआ,जीवन है बेहाल।।
3-
आस-पास अब रह गए,कहने भर को लोग।
प्रेम हीन रिश्ते हुए,लाइलाज यह रोग।।
4-
आस-पास संतति मगर,करें नहीं सहयोग।
मात-पिता मर-मर जिएं,कैसा यह दुर्योग।।
5-
आस-पास रह क्या करें,रहा नहीं जब प्यार।
इक दूजे पर कर रहे,निशि दिन ही जब वार।।

**डॉ. रमा द्विवेदी**
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