IWD acts

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Posted by: ramadwivedi | दिसम्बर 28, 2018

मुक्तक

जीवन सफर ऐसा सफर, न जाने कितने जाते आते

दूर तक कुछ साथ चलते, पल में ही कुछ छूट जाते |

  ज़िंदगी  के इस फलक में चित्र बनते औ बिगड़ते
रिश्ते कुछ मनमोह लेते ,रिश्ते कुछ हम को रुलाते ||
-डॉ. रमा द्विवेदी
Posted by: ramadwivedi | दिसम्बर 28, 2018

मुक्तक

वन-उपवन में ,मरुथल-जल में ,भांति-भांति के फूल खिले
कोई छरहरे ,कोई दोहरे ,रंग बिरंगे  फूल मिले।
आपस में खिल-खिल हँसते ,ईर्ष्या-द्वेष का नाम नहीं
काश! सीख लेते कुछ इनसे, दिल में रहते नहीं गिले।।
**डॉ.रमा द्विवेदी **
Posted by: ramadwivedi | दिसम्बर 28, 2018

दो मुक्तक

नई सोच है , नया दौर है ,नया आज का नारा है
सत्य -अहिंसा अमर रहे , मूल मंत्र यह प्यारा है।
विश्व-शान्ति संदेश हमारा ,सब देशों में न्यारा जो
राम -कृष्ण की गूँज गूँजती , हिंदुस्तान हमारा है।।
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धर्म आधारित कर्म हो अपना,चिंतन यही हमारा है।
कण -कण  में ईश्वर हैं बसते,संतों ने यह उचारा है ।
सब धर्मों का मान यहाँ है,सब रहते हैं मिल-जुल के
अखंड एकता हो भारत की ,अपना आज का नारा है।।
**डॉ. रमा द्विवेदी **

 

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