Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 25, 2019

ईश  कृपा  से ही मिले -दोहे 

1 –

नवयुवकों   को आजकल , बचा एक ही काम |

मात -पिता को त्याग कर , रचते स्वांग तमाम ||

2 –

ध्यान  बुजुर्गों का रखें , खानपान -आराम |

उनके ही आशीष से  ,पूरे  हों सब  काम ||

3 –

राग -द्वेष को त्याग कर , करें सदा सद्कर्म |

सुखमय जीवन का  यही, रहा  एक ही मर्म ||

4 –

बिना सुकर्म  न हो  सकें , भवसागर से पार |

सतत साधना ईश की , जीवन का यह  सार   ||

5 –

ईश  कृपा  से ही मिले , काम ,दाम औ नाम |

धर्म स्थापना के लिए , जन्म लिए  प्रभु राम  ||

** डॉ. रमा द्विवेदी **

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Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 25, 2019

सजन रे झूठ मत बोलो-गीत

सजन रे झूठ मत बोलो ,
हृदय के आवरण खोलो | 
ये रिश्ते  सच से  चलते हैं | 
 हमें बस झूठ छलते हैं || 
हो दिल में बात गर कोई | 
रखें न  दिल में ही गोई || 
कटु  वाणी में मधु  घोलो |  
सजन रे झूठ मत बोलो || 
 
भला चुप रह के क्या मिलता | 
हृदय का  पुष्प कब  खिलता || 
 सहज संवाद  जो करता  | 
 तभी  उत्तर  सही   मिलता | | 
हृदय  की ग्रंथियाँ  खोलो | 
सजन रे झूठ मत बोलो || 

बंधे हम प्रेम बंधन में | 
चलेंगे साथ जीवन में || 
ये राहें कब रहीं समतल | 
नहीं हम ढूँढ़  पाते हल ||  
`समर्पित- प्रेम ‘ को तोलो | 
 सजन रे झूठ मत बोलो || 
 
**डॉ. रमा द्विवेदी **
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Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 25, 2019

प्रेम का पाठ -दो मुक्तक  

खेल -खेल में कालिंदी में ,कृष्ण ने गेंद गिराई थी 
काली नाग के  विष की  खातिर ,लीला एक रचाई थी |
हाहाकार मचा चहुँदिशि था ,मात-सखा सब विकल हुए  
काली नाग को नाथ कन्हैया , बंशी मधुर बजाई थी || 
**************************************************
खेल दिखा कर समझाने को , ईश यहाँ पर आता है 
मानवता के हित  की खातिर,क्या -क्या खेल रचाता है | 
बढ़ा अधर्म है  जब धरती पर ,राम -कृष्ण बनके  आये
दुष्टों का संहार वह  करके , प्रेम का पाठ पढ़ाता है  ||  
 
**डॉ. रमा द्विवेदी **
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Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 25, 2019

कुण्डलिया छंद

बातें होती फूल -सी ,बात चुभाएं शूल |

सहनशक्ति ही दर्द को ,कर देती निर्मूल ||

कर देती निर्मूल, सदा  वो सूजन  कहाता |

जगहित पी के गरल ,शिवा  सत्यम  बन जाता ||

किस्मत का यह खेल ,किसी को मिलती घातें |

बच कर रहना यार ,शूल -सी चुभती बातें ||

**डॉ. रमा द्विवेदी **

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Posted by: ramadwivedi | सितम्बर 24, 2019

वर्षा पर दोहे

1 –
जलप्लावित हो रो रही , है ऐसी  बरसात  |
 मेघों ने देखो  किया , धरती पर  उत्पात ||
2 –
खेती -बाड़ी और घर ,डूब गए हैं धान |
कोप देखकर मेघ  का ,रोया बहुत किसान ||
3-
छाता लेकर चल पड़े ,राशन की दूकान |
पक्षी बैठे दुबक कर ,उगा  नहीं दिनमान ||
4 –
चपला लप -लप कर रही ,घन -घन घन आवाज |
ऐसा अनुभव  हो  रहा , गिरी कहीं पर गाज ||
5 –
उफन -उफन नदिया बहे , नृत्य कर रहे ताल |
  आया जल- सैलाब यूँ  , सागर भरे उछाल ||
6 –
जलप्लावन से हो रहा ,चहुँदिशि हाहाकार |
त्राहि -त्राहि हर ओर  है ,कृपा करो करतार ||
**डॉ. रमा द्विवेदी **
@All Rights Reserved

 

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