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Posted by: ramadwivedi | फ़रवरी 22, 2018

थाली में छेद -लघु कथा

 

 

 

 

लन्दन से पी एच डी  की हुई  मान्या  ने समर सिंह से शादी इसलिए कर ली कि वह आई आई टी खड़गपुर से पढ़ा था ,थानेदार का बेटा  था ,दहेज़ की कोई मांग नहीं थी और अमेरिका में अच्छी नौकरी कर रहा था | शादी होते ही समर सिंह ने उसका पासपोर्ट यह कहकर ले लिया कि वह अपने पास सुरक्षित रखेगा और  बहला फुसलाकर उसके  साठ हजार पौंड  भी ले लिए  | यहां तक कि उसे नौकरी भी न करने दिया |  मान्या यह उसका प्यार समझकर उसकी हर बात मानती रही |
 समर सिंह उससे निर्वस्त्र होकर डांस करवाता और उसकी डाक्यूमेंटरी बनाकर अपने मित्रों को दिखाता |  धीरे- धीरे  मान्या को पता चल गया और उसने अपने माँ – बाप को बताया  लेकिन किसी ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया बल्कि  उसे समझाया कि “एक बच्चा कर लो सब ठीक हो जाएगा” | वह  गर्भवती हो गई लेकिन समर का उत्पात कम नहीं हुआ  |
तब उसने  अपने पिता को मेल में लिखा  -“ तुम लोग मेरी अर्थी में फूल चढाने के लिए आओगे क्या ”?
तब  मान्या  के पिता अपनी पत्नी को उसके पास छोड़ आए |
 मान्या   को लड़की पैदा हुई और यह  समर को बहुत नागवार गुजरा |
    मान्या   की माँ ने कहा- “ तुम यहां से किसी तरह निकल कर भारत चलो |अब तुम्हारा यहां पर रहना उचित नहीं है |  तब  मान्या ने अपना पासपोर्ट ढूँढा और जब पासपोर्ट मिल गया तब एक रात जब समर घर पर नहीं था तीनो कार लेकर ऑर्फन सेंटर गईं  लेकिन वहां जगह नहीं मिली तब  मान्या  ने   भारत में पडोसी रह चुके अमर का दरवाजा खटखटाया | अमर ने आश्रय यह सोच कर  दे दिया कि कुछ दिनों में चली जायेगी लेकिन  मान्या  कोर्ट केस लड़ने के लिए दस महीने तक उनके घर रुक गई |क़ानून का शिकंजा कसते  देख समर भारत भाग गया , उसका पासपोर्ट ज़ब्त हो गया और वह अरेस्ट हो गया  | मान्या को तलाक भी मिल गया |
 अमर  की विदेशी पत्नी ने मान्या की  हर तरह से मदद की लेकिन  मान्या   ने उसके साठ  साल के अमीर पिता डेविड से घनिष्ट संबंध  बना लिए |   डेविड तीस साल की मान्या  के प्रेमोन्माद में पागल हो गया था | उसने  मान्या   को शादी का प्रस्ताव दे दिया |
   मान्या   ने  कहा – “तुम जब अपनी पत्नी को तलाक दे दोगे तभी मैं तुमसे शादी करुँगी ”|
चार बच्चों का पिता डेविड ने अपनी पत्नी को तलाक देकर  मान्या   से शादी कर ली |
अमर की विदेशी पत्नी ने दुखी होकर सिर्फ  इतना ही कहा – “ तुमने जिस थाली में खाया उसी में छेद कर दिया | मेरे ही घर में रहकर तुमने  मेरे साथ विश्वासघात किया | ईश्वर तुम्हें कभी माफ़ नहीं करेगा ”|
-डॉ रमा द्विवेदी
Posted by: ramadwivedi | फ़रवरी 22, 2018

प्यार में धोखा -लघुकथा

 

 

घर पर आईं मिसेज तिवारी से मैंने पूछा -“ नंदिता की शादी क्यों टूट गई, दोनों ने खुद पसंद करके शादी की थी | फिर ऐसा क्या हुआ कि रिश्ता टूट गया  ” |
मिसेज तिवारी ने कहा -“ अब क्या बताऊँ | नंदिता का प्यार अपने सहपाठी श्रीकांत  से हो गया | दोनों ने शादी करने का संकल्प लिया लेकिन श्रीकांत ने शर्त रखी कि शादी से पहले तुम्हें नौकरी छोड़नी पड़ेगी |  नंदिता उसके प्यार में अंधी हो चुकी थी इसलिए उसने उसकी शर्त मान ली |   श्रीकांत का बारह लाख का पैकेज  था |  घर-बर सब अच्छा  देख हमने  दोनों की शादी कर दी |
कुछ ही समय बाद  नंदिता  ने मुझे बताया था कि श्रीकांत उसे किसी से बात नहीं करने देता | यहां तक कि वह कहता है कि बिना मेरी परमीशन अपने भाई -बहन या माँ -बाप से भी बात नहीं करना और  वह रोज मेरा फोन चेक करता है कि मैंने किसी से बात तो नहीं की | आधी रात में किसी न किसी बहाने झगड़ा करता है और मारता -पीटता है और फिर आधी रात को ही मुझे हमारे  घर छोड़ने आता है और गेट पर पहुँचने पर फिर वापस चलने को कहता है और जब वह  नहीं मानती तो फिर मारता है | एक दिन किसी तरह  उसके चंगुल से हाथ छुड़ाकर वह घर आ गई | हमेशा रोती  रहती पर कुछ बताती नहीं |
एक दिन उसके पापा ने पूछा -“ यह सब क्या चल रहा है”  ?
तब उसने  सच बताया |
  उसके पापा ने श्रीकांत से  बात की “ पत्नी को मारना पीटना यह कैसे संस्कार हैं, क्या तुम्हारे मम्मी -पापा ने यही सिखाया है”  ?
श्रीकांत  गुस्से में आ  गया और बोला ,तुम देखना “मैं तुम्हारी बेटी का क्या हाल करता हूँ ” |
 फिर वह नंदिता को लेने नहीं आया और नौकरी छोड़कर पटना चला गया |
जब हमने उसके माता -पिता से पूछा -“ आप नंदिता को लेने कब आ रहे हो” ?
तब उन्होंने कहा -“हमारे पास समय नहीं है, आप लाकर छोड़ दीजिये ”|
हमें यह बात उचित नहीं लगी फिर भी हमने नंदिता की मर्जी जानना चाही |
नंदिता से हमने पूछा -“ क्या तुम जाना चाहती हो ”?
उसने कहा -“ एक बार मैं अंतिम कोशिश करना चाहती हूँ पापा क्योंकि मैंने अपनी पसंद से शादी की है ”|
हम नंदिता को छोड़ आये | उन्होंने उसे नौकरानी बनाकर रखा |घर का पूरा काम उससे ही करवाते |  श्रीकांत उससे बात भी न करता पर सब उसपर कड़ी निगरानी रखते | जब हम फोन करके बात करते  वे सामने रहते|  इसी तरह नौ माह बीत गए |
एक दिन किसी तरह  पड़ोस की लड़की के  सिम से नंदिता ने बात की  तब उसने हमें बताया कि “ अब सहन नहीं होता ,मुझे आकर ले जाओ ”|
हम गाडी लेकर गए और उसे ले आए | तलाक का केस उन्होंने किया | बहुत ही भागदौड़  करने के पश्चात मुश्किल से  तलाक मिल पाया |
नंदिता को बहुत दुःख हुआ कि  उसने प्यार में धोखा खाया लेकिन अब वह आर्थिक रूप से स्वावलंबी  बन गई है |
**डॉ रमा द्विवेदी **

 

Posted by: ramadwivedi | जनवरी 17, 2018

हँसना मना  है-लघुकथा 

मेरी पड़ोसिन सरस्वती ने बातों- बातों में आज बताया कि  “उसके पति को हँसना पसंद नहीं है” |

सुनकर मुझे  बड़ा आश्चर्य हुआ |“ पढ़ा लिखा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ,बड़े पद पर कार्यरत है | फिर भी इतना गंभीर क्यों रहता है” ?
सरस्वती ने बताया कि बिना उसकी परमीशन के घर में कोई काम करने वाला  नहीं आ सकता  | वह कितनी भी बीमार हो उसके लिए उसे खाना बनाना ही पड़ता है ,वह किसी के हाथ का बनाया  खाना नहीं खाता  , यहाँ  तक कि टेबल से पानी का गिलास भी उठाकर नहीं पीता  | वह अपने माता पिता के घर भी एक दिन नहीं रुक सकती ,अगर कभी रुक जाए तो बोलता है “क्यों आई हो ,वही रहो ”|
 बीमार  हो जाए तो डॉक्टर को जरूर दिखायेगा लेकिन देखभाल नहीं करेगा ,बोलेगा “अपनी माँ को बुला लो” |  अपनी बड़ी  होती  दोनों बेटियों से भी कभी भी हँसकर बात नहीं करता पर पढ़ाई की या उनकी जो भी मांग हो तुरंत पूरी करता है |
सरस्वती के लिए  दीवाली के समय चार-चार  लाख के स्वर्ण आभूषण खरीदता है | घर का स्टेटस बहुत अच्छा रखता है | वैसे बहुत जिम्मेदार है लेकिन हँसने पर गुस्सा करता है |
मैंने कहा -“इतनी पाबंदियों में तुम कैसे रहती हो ”?
उसने हँस कर उत्तर दिया “क्या करना ,रहना पड़ता है ,जब हँसने का मन होता है तब सामने रह रही  अपनी भाभी के घर चली जाती हूँ ”|
मैंने सोचा “औरत को घर में शांति बनाए रखने के लिए क्या -क्या  संतुलन बनाना पड़ता है | अब देखो “हँसना भी मना है ” ?
**डॉ रमा द्विवेदी**

 

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